होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा ईरान, संसद ने दी मंजूरी
ईरान की संसद ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बदले जहाजों को सुरक्षा, इंश्योरेंस और समुद्री सेवाएं दी जाएंगी। इस फैसले के बाद अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ तनाव बढ़ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट के रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को लेकर ईरान की संसद ने एक बहुत बड़ा फैसला ले लिया है। ईरानी संसद ने इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करने वाले तमाम मालवाहक जहाजों से टोल या विशेष शुल्क वसूलने के प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके बदले ईरान की ओर से जहाजों को आवश्यक समुद्री सेवाओं के साथ-साथ सुरक्षा और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं मुहैया कराने की बात कही गई है। यह फैसला ऐसे बेहद नाजुक समय में आया है, जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच आपसी तनाव लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
हसन काशकवी ने दी शुल्क और सुरक्षा सेवाओं की जानकारी
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केवल उन्हीं देशों के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी जो निर्धारित समुद्री सेवाओं के बदले यह शुल्क चुकाएंगे। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन काशकवी ने विस्तार से बताया कि वसूली जाने वाली फीस के एवज में जहाजों को जरूरी समुद्री सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाजों को समुद्री सुरक्षा और इंश्योरेंस की कानूनी सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
रियाल और विदेशी करेंसी में भुगतान का विकल्प
संसद में पारित इस प्रस्ताव के तहत जहाजों से वसूला जाने वाला शुल्क ईरानी रियाल में चुकाया जा सकेगा। इसके अलावा शिपिंग कंपनियों को यह विकल्प भी दिया गया है कि वे ईरान की पसंद की किसी दूसरी विदेशी मुद्रा में भी भुगतान कर सकती हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यदि समुद्र में कोई विशेष परिस्थिति बनती है तो जहाजों को ईंधन आपूर्ति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी तकनीकी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का कड़ा रुख
ईरान के इस बड़े फैसले के फौरन बाद अमेरिका ने भी तेहरान पर आर्थिक शिकंजा और ज्यादा कसने के साफ संकेत दे दिए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने तीखा बयान देते हुए कहा कि ट्रम्प प्रशासन अब ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक कार्रवाई के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अमेरिका का सीधा मकसद ईरान की कमाई के बड़े और प्रमुख स्रोतों को पूरी तरह प्रभावित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए अमेरिकी सरकार अपनी सभी जांच एजेंसियों और कानूनी अधिकारों का खुलकर इस्तेमाल करेगी।
मोहसिन रेजाई ने खाड़ी देशों को दी सीधी चेतावनी
दूसरी तरफ, ईरान ने उन सभी खाड़ी देशों को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है, जो अमेरिका की इस आर्थिक कार्रवाई में उसकी मदद कर रहे हैं। ईरान के नए राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ हाथ मिलाकर ईरान पर आर्थिक पाबंदियां लगाने वाले किसी भी देश को सीधे तौर पर दुश्मन माना जाएगा। उनके इस कड़े बयान के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में पहले से सुलग रहा तनाव और ज्यादा भड़कने की आशंका पैदा हो गई है।
मक्का एग्रीमेंट पर मेहदी रहीमी का बड़ा दावा
इसी बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी मेहदी रहीमी ने एक नया दावा करते हुए कहा कि तेहरान को 'मक्का एग्रीमेंट' में शामिल होने का औपचारिक न्योता मिला है। उनके अनुसार, ईरानी सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय या इस समझौते से जुड़े प्रमुख देशों सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने अभी तक इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जबकि इन तीनों देशों ने बीते 7 अगस्त को ही आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
होर्मुज में आमने-सामने ईरान और अमेरिका के रूट
होर्मुज स्ट्रेट के जलमार्ग पर वर्चस्व को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस इलाके को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ करार दे चुके हैं। तनाव बढ़ने के बाद जहाजों की आवाजाही के लिए दो अलग-अलग रास्तों की चर्चा तेज हो गई है; पहला रास्ता ईरान के तट और उसके द्वीपों के पास से जाता है, जबकि दूसरा ओमानी रास्ता ओमान की तरफ है जो ईरानी तट से दूर है। अमेरिका अपने समर्थक देशों के जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए इसी ओमानी रास्ते के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है।
