चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश में 3 मौत, 57 हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश का तट पार किया। तेज हवाओं और भारी बारिश से विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली और काकीनाडा समेत तटीय जिले प्रभावित हुए। मौतों के आंकड़ों में अंतर है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।


Cyclone Arnab News: बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश के तट को पार कर चुका है, लेकिन इसका असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण तटीय इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। अभी तक तीन लोगों की मौत की सूचना सामने आई है, जबकि बिजली के तारों की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बहाली का काम तेज कर दिया है।
125 से 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर की सुबह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश-यानम तट को पार किया। इस दौरान हवा की निरंतर रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची। तट पार करने के बाद चक्रवात कमजोर होकर गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में आ गया। इसके उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है।
कहां कितनी बारिश हुई?
चक्रवात का सबसे अधिक असर आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय जिलों में देखने को मिला। IMD के शुरुआती वर्षा आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर की सुबह से 28 अक्टूबर की सुबह तक कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई।
- विशाखापत्तनम: वेदर स्टेशन पर करीब 216.9 मिमी बारिश दर्ज की गई।
- कलिंगपट्टनम: लगभग 147.5 मिमी बारिश हुई।
- तुनी: करीब 123.3 मिमी बारिश दर्ज की गई।
- काकीनाडा: लगभग 118.4 मिमी बारिश हुई।
- मछलीपट्टनम: करीब 115.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।
इतने लोगों की हुई मौत और इतने सुरक्षित स्थानों में पहुंचे
बता दें, चक्रवात में अभी तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि बिजली के टूटे और खुले तारों की चपेट में आने से दो लोगों की भी मौत हो गई।
आंध्र प्रदेश में करीब 57 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा को मिलाकर एक लाख 80 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए है।
यातायात पर पड़ा असर
चक्रवात के कारण रेल और हवाई सेवाओं को भी नुकसान पहुंचा है। जिसमें करीब 50 ट्रेनों और 21 उड़ानों के रद्द किया गया है। विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और राजमुंदरी के हवाई अड्डों पर मौसम के कारण परिचालन प्रभावित हुआ। यात्रियों को यात्रा से पहले संबंधित एयरलाइन और रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।
ओडिशा में भी भारी बारिश
साथ ही, चक्रवात का असर पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी दिखाई दे रहा है। तटीय और दक्षिणी हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। राज्य के 16 जिलों में स्कूल बंद किए गए और संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। मौसम विभाग ने ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी भी जारी की है।
मध्य प्रदेश में कहां बारिश का अलर्ट?
चक्रवात के बाद बने मौसम संबंधी सिस्टम का असर मध्य प्रदेश में भी देखा जा रहा है। IMD भोपाल के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए उसी बुलेटिन में कोई चेतावनी नहीं दी गई थी। पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए 29 अक्टूबर को बहुत भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना भी जताई गई है।
क्या कमजोर होने के बाद भी चक्रवात खतरनाक है?
जमीन पर पहुंचने के बाद चक्रवात को समुद्र से मिलने वाली ऊर्जा कम हो जाती है, लेकिन उसके कारण होने वाली बारिश, जलभराव, नदियों और नालों में बढ़ता जलस्तर तथा बिजली के तारों से जुड़े खतरे बने रह सकते हैं।