हाइलाइट्स
- भोपाल जिला अदालत ने फर्जी जमानत के मामले में सख्त कार्रवाई की।
- मृतकों के नाम पर दी गई थी जमानत गारंटी ।
- फर्जी जमानतदारों, वकीलों और नोटरीकर्ताओं पर FIR के आदेश।
Bhopal Farzi Jamanat : मध्य प्रदेश। भोपाल की जिला अदालत ने फर्जी जमानत के एक बड़े मामले में सख्त रवैया अपनाया है। अदालत ने फर्जी जमानतदारों, वकीलों और नोटरीकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला निशातपुरा थाने से जुड़ा है।
ईरानी नागरिकों की गिरफ्तारी
27-28 दिसंबर की रात को पुलिस ने निशातपुरा इलाके के एक ईरानी डेरे से 32 वारंटी लोगों को गिरफ्तार किया था। ये सभी लोग विभिन्न अपराधों में वांछित थे। गिरफ्तारी के बाद 5-6 जनवरी को इनमें से 14 आरोपियों को जमानत मिल गई थी।
जमानत कैसे मिली
जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए गए थे। जमानतदारों के रूप में मृत लोगों के नाम इस्तेमाल किए गए थे। कुछ जमानतदारों के दस्तावेज भी नकली निकले। वकीलों और नोटरीकर्ताओं ने इस फर्जीवाड़े में सहयोग किया।
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अदालत ने दिखाई सख्ती
जिला अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 14 ईरानियों की जमानत रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि यह बहुत गंभीर अपराध है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत देना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
एफआईआर के आदेश
अदालत ने निशातपुरा थाने को निर्देश दिए हैं कि फर्जी जमानतदारों, वकीलों और नोटरीकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। जांच में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
पुलिस ने क्या कहा
निशातपुरा थाना पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलने पर संदेह हुआ था। अदालत में दस्तावेजों की जांच हुई तो फर्जीवाड़ा सामने आया। पुलिस अब सभी फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
ओबीसी आरक्षण मामले से अलग
यह मामला ओबीसी आरक्षण से जुड़े नहीं है। यह फर्जी जमानत और दस्तावेजों का अलग केस है। अदालत ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है।
अदालत ने पुलिस को जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। फर्जीवाड़े में शामिल सभी लोगों को जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है। यह घटना न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत को दिखाती है।