हाइलाइट्स
- CM मोहन यादव ने तात्या टोपे और रानी अवंती बाई को जनजातीय नायक बताया।
- डॉ. विक्रांत भूरिया ने बोले- तात्या टोपे मराठा और अवंती बाई लोधी OBC हैं, आदिवासी नहीं।
- गैर-आदिवासी नायकों के नाम पर जनजातीय स्मृति गढ़ना इतिहास की अनदेखी।
MP Politics : भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन्हें जनजातीय नायकों की स्मृति में समर्पित बताया है। उन्होंने अपने X हैंडल पर पोस्ट किया कि क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय (खरगोन), क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय (गुना) और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय (सागर) जनजातीय नायकों को याद करने के लिए बनाए गए हैं।
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सीएम मोहन यादव ने किया ये पोस्ट
सीएम मोहन यादव ने कहा कि ये विश्वविद्यालय क्रांतिकारी जनजातीय नायकों की स्मृति में हैं। तात्या टोपे और रानी अवंती बाई लोधी को भी जनजातीय नायक बताया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में इन नायकों के योगदान को याद किया।
सीएम ने पोस्ट में यह भी बताया कि शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इससे नामांकन में 21 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। नए विश्वविद्यालय शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए हैं।
विक्रांत भूरिया का ऐतराज
आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने सीएम के पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि इतिहास का सम्मान जरूरी है, खिलवाड़ नहीं। तात्या टोपे मराठा थे, आदिवासी नहीं। रानी अवंतीबाई लोधी लोधी (OBC) समाज से थीं, आदिवासी नहीं।
कांग्रेस का आरोप
डॉ. भूरिया ने कहा कि गैर-आदिवासी नायकों के नाम पर जनजातीय स्मृति गढ़ना आदिवासी पहचान और इतिहास की अनदेखी है। अगर सरकार सच में आदिवासियों का सम्मान करना चाहती है तो बिरसा मुंडा, भीमा नायक, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती जैसे असली जनजातीय नायकों को सामने लाए। प्रचार नहीं, ऐतिहासिक ईमानदारी चाहिए।



