Loco Pilots Strike : नर्मदापुरम। भारतीय रेलवे के लोको पायलटों और रनिंग स्टाफ ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के बैनर तले पूरे देश में 48 घंटे की भूख हड़ताल की घोषणा की गई है। यह उपवास आज 2 दिसंबर सुबह 10 बजे से शुरू होकर 4 दिसंबर सुबह 10 बजे तक चलेगा।
खास बात यह है कि कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर रहते हुए ट्रेनें चलाते रहेंगे, लेकिन भोजन के बिना ही काम करेंगे। एसोसिएशन के महासचिव के.सी. जेम्स ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे बोर्ड चेयरमैन सतीश कुमार को पत्र लिखकर इसकी सूचना दी है। उन्होंने रेल मंत्रालय की ‘उदासीनता’ को इसका मुख्य कारण बताया है।
नर्मदापुरम जिले में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आंदोलन रेल प्रशासन द्वारा वर्षों से अनदेखी की जा रही मांगों के खिलाफ है। क्रू लॉबी, रनिंग रूम और ट्रेनिंग सेंटरों में कर्मचारी उपवास रखकर अपना विरोध जता रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि रेलवे में लोको स्टाफ की कमी गंभीर समस्या बन चुकी है।
पूरे देश में लगभग 33,000 पद खाली पड़े हैं, जो ट्रेन संचालन की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। कर्नाटक के दक्षिण-पश्चिमी रेलवे में ही 2,059 पद रिक्त हैं, जो कुल आवश्यकता का 40 प्रतिशत है। इससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में रनिंग अलाउंस (माइलेज रेट) में 1 जनवरी 2024 से 25 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। वर्तमान में लोको पायलट को 100 किलोमीटर पर 530 रुपये और असिस्टेंट को 300 रुपये मिलते हैं, लेकिन डीए (महंगाई भत्ता) 50 प्रतिशत पार करने के बावजूद यह बढ़ोतरी नहीं हुई।
एसोसिएशन इसे रनिंग स्टाफ के साथ ‘भेदभाव’ बता रही है। इसके अलावा, रनिंग अलाउंस पर 70 प्रतिशत आयकर छूट की भी मांग है। वर्तमान में केवल 30 प्रतिशत हिस्सा कर-मुक्त है, बाकी पर टैक्स लगता है।
रेस्ट और ड्यूटी घंटों को लेकर भी नाराजगी है। एसोसिएशन ने 16 घंटे के मुख्यालय रेस्ट के अलावा 30 घंटे का साप्ताहिक रेस्ट देने और क्रू को 36 घंटे के अंदर मुख्यालय वापस लाने की मांग की है। लगातार नाइट ड्यूटी को अधिकतम दो रातों तक सीमित करने तथा ड्यूटी घंटों का सख्त पालन करने की बात कही गई है।
वर्तमान में लोको पायलटों को 12 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है, जो थकान बढ़ाती है। कर्नाटक हाईकोर्ट के 2001 के आदेश के बावजूद आठ घंटे की ड्यूटी सीमा का पालन नहीं हो रहा। एक रिटायर्ड लोको पायलट ने कहा, ‘तीन-चार रातों की लगातार ड्यूटी से एकाग्रता कम होती है, जो दुर्घटना का कारण बन सकती है।’
अन्य मांगों में इंजन (लोको कैब) में एयर कंडीशनर (एसी) और शौचालय की व्यवस्था प्रमुख है। महिला लोको स्टाफ के लिए अलग सुविधाएं, पदोन्नति में पारदर्शिता, ट्रेड पुनर्गठन, लीव रिजर्व की बहाली तथा रनिंग रूम में भोजन की गुणवत्ता सुधार की बात कही गई है।