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Bhopal News : आयुष मंत्रालय ने पूरे देश में फिजिकल CME कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से किए बंद, क्रेडिट प्वाइंट्स पर भी रोक

Ministry of AYUSH has stopped physical CME programs

CME Programs Banned Bhopal News : भोपाल। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने बड़ा फैसला लिया है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन काम करने वाले इस आयोग ने पूरे देश में आयुष चिकित्सकों के लिए होने वाले सभी फिजिकल मोड CME (सतत चिकित्सा शिक्षा) कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक पूरी तरह रोक दिया है। साथ ही CME क्रेडिट प्वाइंट्स देने के सभी प्रस्तावों पर भी रोक लगा दी गई है। अब कोई भी नया CME प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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यह आदेश NCISM के चेयरमैन के निर्देश पर बोर्ड ऑफ एथिक्स एण्ड रजिस्ट्रेशन के प्रेसीडेंट डॉ. एसएम कुदारी ने जारी किया है। आदेश की प्रति राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड सहित देश के सभी राज्य ISM/आयुष काउंसिलों को भेज दी गई है।

एनसीआईएसएम द्वारा जारी पत्र की प्रति
एनसीआईएसएम द्वारा जारी पत्र की प्रति

CME यानी Continuous Medical Education आयुष डॉक्टर्स (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी) के लिए बहुत जरूरी होता है। सेमिनार, वर्कशॉप, कॉन्फ्रेंस आदि में हिस्सा लेकर डॉक्टर्स क्रेडिट प्वाइंट्स कमाते थे। ये प्वाइंट्स लाइसेंस रिन्यूअल, रजिस्ट्रेशन, प्रमोशन और प्रैक्टिस जारी रखने के लिए अनिवार्य होते हैं।

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रोक की आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से CME कार्यक्रमों की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई थी। कई आयोजन सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गए थे।

सोशल मीडिया पर भी इनकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे थे। आयोग को भी शिकायतें मिल रही थीं कि क्रेडिट प्वाइंट्स के लालच में घटिया कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने कहा, “CME से डॉक्टर्स को नई रिसर्च, नई दवाइयां, नई तकनीक और क्लीनिकल स्किल्स सीखने का मौका मिलता था।

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इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलता था। लेकिन कई बार ये कार्यक्रम सिर्फ सर्टिफिकेट बांटने का जरिया बन गए थे। शायद आयोग अब ऑनलाइन या ज्यादा सख्त मानकों वाले CME लाने की तैयारी कर रहा है।”

देशभर में करीब 5 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड आयुष डॉक्टर्स इस रोक से सीधे प्रभावित हुए हैं। खासकर जिन डॉक्टर्स का लाइसेंस 2025-26 में रिन्यू करना है, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी होगी। कई डॉक्टर्स ने चिंता जताई है कि बिना क्रेडिट प्वाइंट्स के उनका रजिस्ट्रेशन रुक सकता है।

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वर्जन
संभव है सीएमई कार्यक्रम आयोजन में और ज्यादा गुणवत्तापूर्ण संसाधनों को शामिल कर एनसीआईएसएम पुन: सीएमई आयोजन को मंजूरी दे। निश्चित रूप से एनसीआईएसएम आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा, सोवा-रिग्पा, नैचरोपैथी जैसी परंपरागत चिकित्सा विधाओं को जन-जन तक पहुंचाने का विश्वसनीय कार्य कर रही है।

डॉ राकेश पाण्डेय

-डॉ राकेश पाण्डेय, राष्ट्रीय प्रवक्ता – आयुष मेडिकल एसोसिएशन

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