Sehore News : सीहोर। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से 20 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद भी सीहोर जिले की ज्यादातर मेडिकल दुकानों पर अनियमितता का खेल चल रहा है। यहां बिना प्रशिक्षित फार्मासिस्ट के दवाएं बेची जा रही हैं। इससे मरीजों की जान पर बन आई है। एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें दिखा कि दुकान पर आठवीं पास लड़का दवाएं बांट रहा था। बिना सलाह के गंभीर दवाएं दे दी जाती हैं। स्थानीय लोग डरे हुए हैं।
लाइसेंस नाम के धोखे में दुकानें चल रही हैं। लाइसेंस किसी फार्मासिस्ट का होता है। लेकिन दुकान कोई और चला रहा होता है। अक्सर युवक होते हैं। उन्हें दवाओं की सही जानकारी नहीं। वे बिना सोचे दवाएं थमा देते हैं। इससे गलत दवा लेने से बीमारी बढ़ जाती है। कुछ दुकानों पर बाहरी डॉक्टर बिना रजिस्ट्रेशन के मरीज देखते हैं। फीस लेते हैं। फिर चले जाते हैं। बिना जांच के दवाएं लिख देते हैं। मरीजों की हालत बिगड़ जाती है।
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ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। छिंदवाड़ा कांड के बाद यहां कोई बड़ी जांच नहीं हुई। दुकानों पर नजर रखने वाले इंस्पेक्टर किरण मगरे ने कहा। वे समय-समय पर चेक करते हैं। गलती मिले तो कार्रवाई होती है। अभी वे छिंदवाड़ा टीम में हैं। लेकिन जल्द सीहोर की दुकानों का निरीक्षण करेंगे।
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सीएमएचओ डॉ. सुधीर डहेरिया ने निर्देश दिए हैं। जांच जल्द होगी। स्थिति की समीक्षा करेंगे। लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं। कार्रवाई सिर्फ कागजों पर है। जिले में सैकड़ों दुकानें हैं। ज्यादातर बिना फार्मासिस्ट चल रही हैं। हाल ही में एमपी फार्मेसी काउंसिल ने सख्त नियम बनाए। बिना फार्मासिस्ट दवा बेचने पर 3 महीने जेल या 2 लाख जुर्माना। लेकिन अमल नहीं हो रहा।