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MP News : नहीं भरी 4100 रुपये की क़िस्त, एजेंट ने पिता-पुत्र पर डाला खौलता पानी; क्या हैं RBI की गाइडलाइन?

Agent Pours Boiling Water on Father and Son for not Paying Installment

Agent Pours Boiling Water on Father and Son for not Paying Installment : सतना, मध्य प्रदेश। सतना जिले के नागौद कस्बे में जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिकवरी एजेंट ने क़िस्त नहीं चुका पाने पर वसूली के लिए खौफनाक कदम उठाया है। जानकारी के मुताबिक, व्यवसायी निशांत सोनी और उनके पिता राजेंद्र प्रसाद सोनी (63) ने 75 हजार के लोन की एक किस्त नहीं चुकाई थी, जिस पर एजेंट ने पिता- पुत्र पर पर उबलता पानी फेंक दिया। दोनों बुरी तरह झुलस गए, अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं। आइये जानते हैं क्या है ये मामला और क्या कहती हैं RBI की गाइडलाइन?

ये है पूरा मामला

दरअसल, निशांत सोनी ने अपना छोटा कारोबार खड़ा करने के लिए जना स्मॉल फाइनेंस बैंक से 75 हजार रुपये का लोन लिया था। मासिक किस्त 4,100 रुपये – जो उनके लिए बोझ नहीं, बल्कि सपने का ईंधन था। लेकिन किस्मत ने साथ छोड़ दिया: नौकरी चली गई, बीमारी ने घेर लिया। सितंबर की सिर्फ एक किस्त बाकी रह गई। इसी वसूली के लिए बैंक की कर्मचारी सानिया सिंह परिहार और हर्ष पांडेय घर पहुंचे।

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निशांत ने मजबूरी बताई, लेकिन एजेंट भड़क गए – गाली-गलौज शुरू। बीच-बचाव करने लगे राजेंद्र सोनी, जो गांधी चौक पर समोसे का ठेला लगाते हैं। लेकिन विवाद बढ़ा, तो आरोपियों ने घर में उबलते आलू के पानी का कटोरा उठाया और पिता-पुत्र पर उंडेल दिया। चीखें गूंजीं, चेहरे-हाथ जल गए। पड़ोसी दौड़े, लेकिन तब तक देर हो चुकी।

नागौद सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कहा: राजेंद्र के हाथ-चेहरा झुलस गया, निशांत के सीने पर गंभीर चोटें। दोनों का इलाज जारी है, लेकिन परिवार का रोना थमने का नाम नहीं ले रहा।

पीड़ित परिवार का दर्द तो दिल दहला देता है। राजेंद्र सोनी, 63 साल की उम्र में ठेले पर मेहनत करके परिवार चलाते हैं। निशांत, सपनों का पीछा करने वाला बेटा, अब बिस्तर पर कराह रहा। एक रिश्तेदार ने बताया, “एक किस्त के लिए ये क्रूरता? ये तो इंसानियत की हत्या है।”

नागौद पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। दोनों आरोपियों – सानिया सिंह परिहार और हर्ष पांडेय – के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 115 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना), 351 (आपराधिक धमकी) और अन्य के तहत FIR दर्ज कर ली। थाना प्रभारी ने कहा, “मौके पर पहुंचे, बयान लिए। जांच पूरी होने पर कार्रवाई होगी।” लेकिन सवाल यह कि RBI के नियमों का क्या? जना बैंक जैसी संस्थाएं क्यों ऐसी जंगली रिकवरी की इजाजत देती हैं?

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क्या है आरबीआई के दिशा-निर्देश
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों और उनकी ओर से काम करने वाले रिकवरी एजेंट्स के लिए दिशानिर्देश तय कर रखे हैं.

इन दिशानिर्देशों में प्रावधान किया गया है कि: लोन की रिकवरी के समय एजेंट को हमेशा बैंक की तरफ़ से जारी अधिकृत पत्र और पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है।
आरबीआई के निर्देश हैं कि लोन रिकवरी एजेंट किसी भी स्थिति में धमकी, गाली-गलौज या हिंसा नहीं कर सकते।

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एजेंट ग्राहकों से केवल तय समय पर ही संपर्क कर सकते हैं। ग्राहक को एजेंट के बर्ताव के ख़िलाफ़ शिकायत करने और उसका समाधान पाने का अधिकार है।
बैंक अपने लोन रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार होता है। अगर कोई एजेंट इन नियमों का उल्लंघन करता है तो कार्रवाई संबंधित बैंक पर की जा सकती है।

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