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जबलपुर मेडिकल कॉलेज में चूहों का कहर, दो महिलाओं समेत 3 मरीजों के पैर बुरी तरह कुतरे, डीन बोले ये मामूली घटना…

Rats bite two women feet

Rats Bite Women Feet in Jabalpur Medical College : जबलपुर। इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के हमले से दो नवजातों की मौत के बाद अब जबलपुर में दो मरीजों के पैरों चूहों द्वारा कुतरने का मामला सामने आया है। यह घटना सोमवार शाम को सामने आई जब मरीजों के परिजनों ने खुलासा किया कि वार्ड में भर्ती दो मरीजों के पैर चूहों ने काट लिए। विभाग अध्यक्ष, अधीक्षक और डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने तुरंत जांच के आदेश दिए।

शुरुआती जांच में साफ हो गया कि डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी लापरवाही इसके पीछे है। विभाग का भवन रेनोवेशन के दौर से गुजर रहा है, इसलिए संचालन ऑर्थोपेडिक विभाग के पहले तल पर हो रहा है। यही वह जगह है जहां चूहों ने अपना अड्डा बना लिया।

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में चूहों का कहर, दो महिलाओं समेत 3 मरीजों के पैर बुरी तरह कुतरे, डीन बोले ये मामूली घटना…

परिजनों ने बताया कि वार्ड में चूहे दिन-रात घूमते रहते हैं- रात की स्याही में तो खैर, लेकिन दिन की रोशनी में भी! उन्होंने आगे कहा, “हमारी मां को इलाज के लिए लाए थे, लेकिन यहां तो चूहों का इलाज हो गया।” हाल ही में इंदौर की घटना ने तो हाईकोर्ट तक हिला दिया था, जहां सरकार से रिपोर्ट मांगी गई। क्या जबलपुर की यह घटना भी उसी दर्द की कड़ी है?

डॉक्टरों की लापरवाही: शिकायत पर इंजेक्शन, लेकिन चूहों पर कोई कार्रवाई नहीं। इतना ही नहीं जब एक मरीज ने चूहे के काटने की शिकायत की, तो डॉक्टर ने सिर्फ इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी। वार्ड साफ करने या चूहों से निपटने का कोई इंतजाम नहीं! नतीजा? दूसरे मरीज को भी चूहों ने निशाना बना लिया।

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डीन का बयान और पेस्ट कंट्रोल के वादे

डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने कहा, “सोमवार रात को जानकारी मिली। मरीजों को पूरा इलाज दिया गया, वे स्वस्थ हैं और डिस्चार्ज हो चुके।” अधीक्षक ने वार्ड का निरीक्षण किया, जहां पेस्ट कंट्रोल के सामान – केक, गोलियां, प्लेट मिले। इंदौर घटना के बाद से सतर्कता बरती जा रही है, ठेकेदार कंपनी को निर्देश दिए गए हैं।

केस-1: 

सिहोरा की 25 साल की रजनी यादव सिरदर्द की शिकायत पर 9 सितंबर को विभाग में भर्ती हुईं। रात के सन्नाटे में चूहे ने उनके पैर की एड़ी पर हमला बोला। गहरा लाल निशान बन गया, दर्द असहनीय। परिजनों ने डॉक्टर को बताया, तो सलाह मिली – इंजेक्शन लगवाओ। तीन इंजेक्शन लगे, लेकिन चूहों का डर बरकरार। शनिवार को डिस्चार्ज हो गईं, लेकिन घाव तो जीवन भर का साथी बन गया। रजनी ने कहा, “मैं तो ठीक होने आई थी, लेकिन अब डर लगता है अस्पताल जाने से।”

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केस-2: एड़ी पर चूहों का प्रहार

नरसिंहपुर के गोटेगांव से आईं 50 साल की सरोज मेहरा को भी चूहों ने नहीं बख्शा। बेटे जगदीश ने मां को भर्ती कराया। दो दिन बाद चूहों ने एड़ी काट ली। अगले दिन फिर वही दर्द! जगदीश ने बताया, “रात को मां की चीख सुनकर उठा, तो पैर खून से लथपथ। मैंने भी चूहे को महसूस किया जब वो मेरे पैरों की ओर बढ़ा।” नर्स को बताया, लेकिन कोई फर्क न पड़ा। दिन में भी चूहे घूमते, मानो वार्ड उनका घर हो। सरोज अब घर पर हैं, लेकिन डर का साया बरकरार।

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