Narmadapuram News : नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश में सहकारिता समितियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। 8 सितंबर से शुरू हुई यह हड़ताल अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुकी है और कर्मचारी अपनी आवाज बुलंद करने से पीछे नहीं हट रहे। नर्मदापुरम जिले के मुख्यालय में पीपल चौक पर धरना दे रहे हैं। ये कर्मचारी बकाया वेतन और नौकरी की सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगों के लिए लड़ रहे हैं। यह हड़ताल न सिर्फ सहकारिता क्षेत्र को प्रभावित कर रही है, बल्कि किसानों और आम उपभोक्ताओं की जिंदगी पर भी असर डाल रही है।
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सहकारिता समिति कर्मचारी महासंघ के बैनर तले यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैला हुआ है। गुरुवार को हड़ताल के चौथे दिन नर्मदापुरम में पीपल चौक पर धरना जारी रहा, लेकिन यहां सिर्फ 20 कर्मचारी ही नजर आए। महासंघ के संभागीय अध्यक्ष हरिओम रघुवंशी और जिला अध्यक्ष भगवान सिंह राजपूत ने बताया कि हड़ताल के कारण सहकारी समितियों से डीएपी और यूरिया जैसे उर्वरकों का वितरण पूरी तरह ठप हो गया है। साथ ही, राशन दुकानों का कामकाज भी प्रभावित हुआ है, जिससे आम लोग परेशान हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरे मध्य प्रदेश में हजारों कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं और हर दिन पीपल चौक जैसे स्थानों पर धरने दे रहे हैं। यह आंदोलन 23 सितंबर तक जारी रहेगा, जब तक कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती।
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कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज किया, तो अगला कदम राजधानी भोपाल की ओर होगा। वहां महासंघ के पदाधिकारी और सदस्य बड़े स्तर पर धरना देंगे, जो इस संघर्ष को और तेज कर सकता है। यह सिर्फ एक हड़ताल नहीं, बल्कि सहकारिता क्षेत्र के कर्मचारियों की वर्षों से दबी हुई आवाज है, जो अब फूट पड़ी है।
महासंघ की तीन मुख्य मांगें हैं, जिन पर वे अड़े हुए हैं। पहली मांग है कि 60 प्रतिशत कर्मचारियों का चयन जिला बैंकों में किया जाए, ताकि उनकी नौकरी सुरक्षित हो सके। दूसरी, अक्टूबर 2023 से प्रत्येक विक्रेता को 18 महीनों का बकाया 54,000 रुपये का भुगतान किया जाए। यह राशि उनकी मेहनत का हक है, जो लंबे समय से अटकी पड़ी है। तीसरी मांग सभी जिलों में बढ़े हुए वेतन को लागू करने की है, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। ये मांगें नई नहीं हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता ने इन्हें और गंभीर बना दिया है।
इस हड़ताल का असर सहकारिता समितियों के दैनिक कार्यों पर साफ दिख रहा है। किसान उर्वरक न मिलने से परेशान हैं, और राशन दुकानों पर लाइनें लग रही हैं। कर्मचारी कहते हैं कि वे मजबूरी में यह कदम उठा रहे हैं, क्योंकि बातचीत के कई दौर असफल हो चुके हैं। महासंघ के नेता हरिओम रघुवंशी ने कहा, “हमारी मांगें जायज हैं, और हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिलता।” इसी तरह, भगवान सिंह राजपूत ने जोड़ा कि यह संघर्ष पूरे प्रदेश के सहकारिता कर्मचारियों की एकजुटता का प्रतीक है।
गौरतलब है कि, सहकारिता क्षेत्र मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां लाखों कर्मचारी काम करते हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का आधार हैं। लेकिन बकाया भुगतान और वेतन वृद्धि जैसे मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है।