Leopard Terror in Satpura Tiger Reserve: नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर एक तेंदुआ नर्मदापुरम के गांवों में ऐसा आतंक मचा रहा है कि ग्रामीण रात को घर से निकलने से भी डर रहे हैं। यह तेंदुआ न सिर्फ बकरियों, मुर्गियों और कुत्तों को अपना शिकार बना रहा है, बल्कि स्कूलों को बंद करने और लोगों के दिलों में खौफ पैदा करने का कारण बन गया है। तीन बार पकड़े जाने के बाद भी यह जंगल में नहीं रुक रहा और बार-बार गांवों की ओर लौट रहा है।
तेंदुए का बार-बार लौटना
नर्मदापुरम जिले के हिरणचापड़ा, खखरापुरा, सहेली और अन्य गांवों में पिछले तीन महीनों से यह तेंदुआ आतंक का पर्याय बना हुआ है। पहली बार 19 जून 2025 को इसे सिंघानामा के पास पकड़ा गया और चूरना के घने जंगल में छोड़ा गया। लेकिन यह तेंदुआ जंगल में नहीं रुका। 26 जुलाई को यह बासनिया गांव में एक घर की रसोई में घुस गया, जिसे फिर जंगल की ओर भगाया गया।
इसके 15 दिन बाद यह फिर से सात गांवों में घूमता दिखा, जहां इसने पालतू पशुओं को निशाना बनाया। 23 अगस्त को खखरापुरा के पास पिंजरे में फंसने के बाद इसे फिर से गहरे जंगल में छोड़ा गया, लेकिन 12 दिन बाद यह धांसई और सातलदेही के रहवासी इलाकों में लौट आया।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व ने इस तेंदुए को पकड़ने के लिए धांसई, सातलदेही और केली में तीन पिंजरे लगाए हैं, लेकिन यह बकरी के लालच में भी नहीं फंस रहा। तेंदुए को पहली बार पकड़ते समय कॉलर आईडी लगाई गई थी, जिससे इसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। फिर भी यह बार-बार बफर जोन और गांवों में पहुंच रहा है।
इटारसी के पावरग्रिड परिसर और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के पास भी दो तेंदुओं के मूवमेंट ने दहशत फैला रखी है। पावरग्रिड के पास एक स्कूल को एक सप्ताह से बंद करना पड़ा है।
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वन विहार स्थानांतरण की योजना
फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि तेंदुए की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों की जानमाल की रक्षा भी जरूरी है। इसलिए अब इसे वन विहार भेजने की अनुमति मिल चुकी है। ग्रामीणों को रात में अकेले न निकलने और पशुओं को घर के अंदर बांधने की सलाह दी गई है।