मध्य प्रदेश। हरदा के गोलापुरा मोहल्ले में एक ऐसी परंपरा है, जो पिछले 26 सालों से लोगों के दिलों में बस गई है। गोसाई मंदिर में श्राद्ध पक्ष के दौरान निशुल्क सामूहिक तर्पण का आयोजन हर साल 16 दिनों तक चलता है, जो पितरों के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बन चुका है। इस अनोखी पहल ने न सिर्फ ग्रामीणों को जोड़ा, बल्कि उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव भी लाया है।
हरदा जिले के गोलापुरा मोहल्ले में स्थित गोसाई मंदिर में पिछले 26 सालों से एक अनूठी परंपरा जारी है। श्राद्ध पक्ष के दौरान यहां निशुल्क सामूहिक तर्पण का आयोजन होता है, जो पूरे 16 दिनों तक चलता है। इस पवित्र कार्य की शुरुआत साल 2000 में हुई थी और तब से यह धार्मिक आयोजन हर साल बढ़ते जज्बे के साथ मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित विवेक मिश्र इस तर्पण को विधि-विधान से कराते हैं, जो इसे और खास बनाता है।
जब यह परंपरा शुरू हुई थी, तब सिर्फ 30 लोग इसमें हिस्सा लेते थे। लेकिन आज यह संख्या 200 से भी अधिक हो गई है, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। पंडित मिश्र बताते हैं कि शुरू में लोगों में तर्पण को लेकर कई भ्रांतियां थीं। जब उन्हें इसके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में समझाया गया, तो उनकी रुचि बढ़ने लगी।
वे कहते हैं कि अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के 16 दिन पितृपक्ष कहलाते हैं। इस दौरान मुख्य तिथियों पर श्राद्ध किया जाता है, जबकि तर्पण हर रोज होता है, जो पितरों की आत्मा की शांति के लिए जरूरी माना जाता है।
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इस आयोजन से जुड़े श्याम शर्मा पिछले 10 सालों से नियमित रूप से तर्पण में भाग ले रहे हैं। वे कहते हैं कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। पंडित मिश्र गरुड़ पुराण का हवाला देते हुए कहते हैं कि पितृकार्य को देवकार्य से भी अधिक महत्व दिया गया है।
उनकी मान्यता है कि हर व्यक्ति, चाहे वह कितना ही गरीब क्यों न हो, तिल, जौ और चावल मिले जल से तिलांजलि देकर पितरों को संतुष्ट कर सकता है। अगर यह भी संभव न हो, तो दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण करने से भी वे प्रसन्न होते हैं। ग्रामीणों की बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा आज भी जीवित है।