MP Teachers Salary Hike 2025 Update : मध्य प्रदेश। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों के लिए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी शिक्षकों को अब चौथा वेतनमान दिया जाएगा। इस फैसले से सरकार पर 117 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, लेकिन शिक्षकों का सम्मान और उनके हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। यह कदम शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है और शिक्षा क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करेगा।
शिक्षकों का योगदान और सम्मान
प्रशासन अकादमी, भोपाल में आयोजित इस समारोह में सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षक CBSE और ICSE जैसे बोर्ड्स को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, सरकारी स्कूलों के छात्र राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षकों के कल्याण के लिए सरकार हमेशा ठोस कदम उठाएगी। चौथा वेतनमान लागू करने का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा।
उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मान
समारोह में प्रदेशभर से चुने गए 14 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। प्रत्येक को 25 हजार रुपये की सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल, और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इसके अलावा, 2024 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं, दमोह की शासकीय माध्यमिक शाला लिधौरा के माधव प्रसाद पटेल और मंदसौर की शासकीय हाई स्कूल की सुनीता गोधा को भी शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न, और 5 हजार रुपये की सम्मान राशि से सम्मानित किया गया।
चौथा वेतनमान: किसे मिलेगा लाभ?
चौथे वेतनमान का लाभ उन शिक्षकों को मिलेगा, जिन्होंने 1 जुलाई 2023 तक 35 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। पहले यह सुविधा केवल शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक सीमित थी, लेकिन अब शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलेगा। यह निर्णय शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की उपलब्धि
मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है कि इस वर्ष भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए दमोह की शीला पटेल (शासकीय प्राथमिक शाला, पथरिया) और आगर-मालवा के भैरूलाल ओसारा (शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला, खेरिया) को चुना। नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन शिक्षकों को सम्मानित किया। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के शिक्षा क्षेत्र की प्रगति को दर्शाती है।