Poshan Prahari Abhiyan : हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में कुपोषण को लेकर सामने आए आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जिले में करीब 400 बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं, जबकि गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) की दर 18.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अब एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत अधिकारी और समाजसेवी कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनके पोषण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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कलेक्टर ने शुरू किया ‘पोषण प्रहरी अभियान’
जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने कुपोषण के खिलाफ ‘पोषण प्रहरी अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषण आहार और जरूरी देखभाल उपलब्ध कराना है।
कलेक्टर ने बताया कि जिले के अधिकारी और समाज के जिम्मेदार लोग आगे आकर दो-दो कुपोषित बच्चों को गोद ले रहे हैं, ताकि उन्हें बेहतर पोषण मिल सके और वे सामान्य स्वास्थ्य की ओर लौट सकें।
हरदा को माना गया कुपोषण का हॉटस्पॉट
न्यूट्रिशन ट्रैकर 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार हरदा को मध्य प्रदेश के उन जिलों में शामिल किया गया है, जहां गंभीर कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है। वहीं नीति आयोग की डिस्ट्रिक्ट न्यूट्रिशन प्रोफाइल के मुताबिक, जिले में 5 साल से कम उम्र के करीब 66 प्रतिशत बच्चे एनीमिया यानी खून की कमी से प्रभावित हैं। कई बच्चे कम वजन और कम लंबाई जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं।
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घर-घर पहुंच रहे अधिकारी
अभियान के तहत अधिकारी सीधे बच्चों के घर पहुंचकर उनकी स्थिति का जायजा ले रहे हैं। शनिवार को तहसीलदार राजेंद्र पंवार ग्राम पंचायत पलासनेर की आंगनवाड़ी पहुंचे और पांच कुपोषित बच्चों के परिवारों को पोषण आहार किट वितरित की।
उन्होंने बच्चों की माताओं को नियमित रूप से दाल, हरी सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ देने की सलाह दी। साथ ही बच्चों का समय-समय पर वजन और ऊंचाई मापने पर भी जोर दिया।
जनभागीदारी पर प्रशासन का जोर
जिला प्रशासन ने सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम लोगों से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। प्रशासन का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही जिले को कुपोषण मुक्त बनाया जा सकता है। अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य सिर्फ पोषण किट बांटना नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार लाना है।