Betul News : बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के भीमपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत बाटलाकला ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बिछा है कि ग्रामीण आज बेहाल हैं। सरपंच, उपसरपंच और सचिव की तिकड़ी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएम आवास) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जैसी महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं में जमकर लूट मचाई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, जबकि असली पात्र लाभार्थी खाली हाथ हैं। यह भ्रष्टाचार न केवल गांव के विकास को ठप कर रहा है, बल्कि गरीबों के सपनों पर भी भारी पड़ रहा है।
फर्जी मजदूरी का घोटाला
ग्रामीण सदाशिव बामने, शिवप्रसाद बामने, शिवचरण धुर्वे, अशोक नागले, फूलचंद हरसुले और अलकेश धुर्वे जैसे कई निवासियों ने पंचायत स्तर पर फैले भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। उपसरपंच राहुल करछले और उनकी पत्नी आकांक्षा करछले ने खुद के नाम पर मनरेगा में 6 दिनों की मजदूरी के 1326 रुपये गलत तरीके से हड़प लिए।
राहुल के एक दोस्त के नाम पर भी 7 दिनों की 1547 रुपये की मजदूरी दर्ज की गई, जबकि वह व्यक्ति काम पर मौजूद ही नहीं था। रोजगार सहायक भूरेलाल पाटिल पर भी गंभीर आरोप हैं। उन्होंने अपने पिता भैय्या लाल को 7 दिनों की 1547 रुपये और दोस्त रंगू को 3 दिनों की 612 रुपये की मजदूरी बिना काम के दिलाई।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के रजिस्टर में हेरफेर कर फर्जी नाम जोड़े जाते हैं, जबकि असली मजदूरों को मजदूरी का एक पैसा भी नहीं मिलता। सदाशिव बामने ने दर्द भरी आवाज में कहा, “हम खेतों में पसीना बहाते हैं, लेकिन पैसे सरपंच-उपसरपंच के जेब में जाते हैं।
मनरेगा का मतलब हम गरीबों के लिए रोजगार था, लेकिन यह भ्रष्टाचार का हथियार बन गया।” शिवचरण धुर्वे ने जोड़ा, “रोजगार सहायक भूरेलाल खुद फर्जी एंट्री करवाते हैं। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन ऊपर तक पहुंच ही नहीं पाती।”
पीएम आवास योजना में भी लूट
पीएम आवास योजना में भी सरपंच-उपसरपंच की मनमानी ने ग्रामीणों को लूट लिया। उपसरपंच राहुल करछले के परिवार के तीन सदस्यों को आवास स्वीकृत हुए थे, लेकिन केवल दो का निर्माण हुआ। तीसरे आवास की पूरी राशि आहरित हो चुकी है, लेकिन निर्माण का नामोनिशान नहीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह राशि भी सरपंच के खाते में गायब हो गई। फूलचंद हरसुले ने गुस्से में कहा, “पीएम आवास गरीबों के लिए था, लेकिन यहां तो अमीरों का खेल चल रहा है। हम पात्र हैं, लेकिन फाइलें गायब हो जाती हैं।”
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अलकेश धुर्वे ने बताया कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर टेंडर फिक्स होते हैं, और गुणवत्ता का ध्यान नहीं। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत CEO और जिला कलेक्टर से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों तक पहुंचने की योजना बना रहे हैं।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि अगर इन भ्रष्टाचारियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो पंचायत के कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे। अशोक नागले ने चेतावनी दी, “हमने सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। अगर जिम्मेदार अफसर चुप रहे, तो गांव भर में धरना देंगे।”