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MP News : आदिवासियों का उग्र विरोध, अभयारण्य-बांध प्रोजेक्ट से विस्थापन के खिलाफ हरदा-बैतूल में धरना

Fierce protest by tribals

Tribals Fierce Opposition : मध्य प्रदेश। हरदा जिले के रहटगांव में प्रस्तावित डॉ. राजेंद्र प्रसाद वन अभयारण्य, मोरंड-गंजाल बांध परियोजना और सतपुड़ा गो अभयारण्य के खिलाफ आदिवासियों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। हरदा, बैतूल और नर्मदापुरम जिलों से सैकड़ों आदिवासी दोपहर में तेजाजी चौक पर इकट्ठा हुए। यहां 1 से 3 बजे तक एक जोरदार जनसभा हुई, जिसमें वक्ताओं ने परियोजनाओं के खिलाफ आवाज बुलंद की।

इसके बाद कलेक्ट्रेट तक एक विशाल रैली निकाली गई और डेढ़ घंटे तक कलेक्ट्रेट गेट पर धरना दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर, नारे और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई, जो दूर से ही सनसनी फैला रही थी।

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जयस (जन आदोलन संघर्ष संगठन) के जिला संरक्षक धनसिंह भलावी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा हरदा जिला ग्रीन बेल्ट सूची में आता है, यानी यह पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। फिर भी आदिवासियों को जबरन विस्थापित करने की साजिश रची जा रही है। भलावी ने चेतावनी दी, “विस्थापन के बाद न घर मिलेगा, न नौकरी। मिलेगा तो सिर्फ पुलिस का डंडा और प्रशासन का अंडा।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी इस भूमि के मूल निवासी हैं, यहां उनके पुरखों की हड्डियां गड़ी हैं, फिर भी उन्हें किराएदार बना दिया गया है। आंदोलन में जयस जिलाध्यक्ष सत्यनारायण सुचार, राकेश काकोडिया, राहुल पवारे, महेंद्र काशिव, सुमित्रा चौहान समेत बड़ी संख्या में आदिवासी शामिल हुए। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे और मजबूत बनाया।

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मोरंड-गंजाल बांध परियोजना से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले 42 गांवों के निवासी चिंतित हैं। यह परियोजना नर्मदा नदी की सहायक नदियों मोरंड और गंजाल पर बनने वाली है, जो हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल और खंडवा जिलों को प्रभावित करेगी। ग्रामीणों का कहना है कि इससे हजारों पेड़ कटेंगे, आदिवासी विस्थापित होंगे और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। बिना ग्राम सभा की अनुमति के यह काम नियमों का उल्लंघन है।

पुराने आंकड़ों के मुताबिक, इस परियोजना से 199 गांवों की 64 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, लेकिन डूब क्षेत्र में 2250 हेक्टेयर जंगल और चार लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट हो सकते हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने भी चेतावनी दी है कि इससे सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बाघ आवास जलमग्न हो सकते हैं, जिससे जैव विविधता पर खतरा मंडराएगा।

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डॉ. राजेंद्र प्रसाद वन अभयारण्य 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 8 पंचायतों की जमीन पर प्रस्तावित है। भलावी ने पूर्व सांसद संजय शाह पर बिना अनुमति सहमति देने का गंभीर आरोप लगाया और परियोजना को तुरंत निरस्त करने की मांग की। सतपुड़ा गो अभयारण्य का विस्तार भी इसी क्षेत्र में हो रहा है, जो आदिवासियों की आजीविका को प्रभावित करेगा।

प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें परियोजनाओं पर रोक लगाने, ग्राम सभा की सहमति लेने और विस्थापितों के लिए उचित पुनर्वास की मांग की गई। प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आश्वासन दिया लेकिन आदिवासियों का कहना है कि जब तक परियोजनाएं रद्द न हों, आंदोलन जारी रहेगा।

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