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बेगमों के ख्वाब से बनी भोपाल की मोती मस्जिद

मध्य प्रदेश का भोपाल शहर, वैसे से अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन इस शहर में छिपी हुई  एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है। जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। और देखकर इसकी खूबसूरती और इसके पीछे की कहानी में खो जाए।

 

दरअसल, हम बात कर रहे हैं मोती मस्जिद की, जो सिर्फ अपनी शानदार वास्तुकला के लिए ही नहीं बल्कि इसके बनने की दास्तान भी उतनी ही खास है। आइए जानते हैं भोपाल में छिपी इस खूबसूरती ऐतिहासिक धरोहर के बारे में। 

 

कहां से हुई शुरुआत ? 

आज से करीब 150 साल पहले इस मस्जिद की नींव रखी गई थी। लेकिन इसे बनाने का ये कोई साधारण निर्माण नहीं था। इस मस्जिद को बनाने में तीन पीढ़ियों की महिलाओं का योगदान रहा है। सबसे पहले इस खूबसूरत ख्वाब को गौहर कुदसिया बेगम ने देखा था। जो भोपाल की पहली महिला शासक थीं। इसके बाद उनकी बेटी सिकंदर जहां बेगम ने इस सपने को आगे बढ़ाया और इस मस्जिद बनवाने की पहल की। हालांकि, सिकंदर बेगम इसे अपने जीवनकाल में पूरा नहीं कर सकीं। लेकिन उनकी बेटी शाहजहां बेगम ने मां और नानी के इस अधूरे ख्वाब को हकीकत में बदल दिया। 

 

इस तरह से भोपाल में बनी मोती मस्जिद के निर्माण में तीन मां-बेटियों की मिलकर की गई कोशिशें शामिल रहीं। शायद यही कारण है कि ये मस्जिद केवल एक इमारत नहीं, बल्कि उन महिलाओं के खुले विचारों, दूरदर्शिता और धार्मिक भावना की प्रतीक बन गई है। 

 

ऐसे हुई मस्जिद की बनावट 

अगर हम मस्जिद की बनावट की बात करें तो उसकी एक एक चीज पर गहरा काम किया गया। इसे ऊंचे चबूतरे पर लाल पत्थरों से बनाया गया है। सामने तीन दरवाजे हैं और अंदर वुज़ू के लिए दो हौज बने हुए हैं। इसकी सबसे अच्छी  बात यह है कि इसका वास्तुशिल्प दिल्ली की जामा मस्जिद से मिलता-जुलता है। लेकिन आकार में यह उससे छोटी है। 

 

जब आप मोती मस्जिद को देखेंगे तो इसकी चमक आपको सच में मोती की याद दिला देगी। एक दम चमचमाता हुआ। जैसे सूरज की रोशनी किसी बहती हुई नदी पड़ती है। ठीक इसी तरह शहर के बीचों बीच स्थित मोती मस्जिद दूर से नजर आती है। आपको बता दें कि, ये पूरी मस्जिद सफेद संगमरमर से बनी है। जो धूप में चमकती है और शायद इसी वजह से इसका नाम ‘मोती मस्जिद’ पड़ा। इतना ही नहीं  इसके गहरे लाल रंग के मीनारें और सुनहरे बुर्ज इसकी सुंदरता को और भी निखार देते हैं। 

 

यहां घूमने दूर दूर से लोग पहुंचते हैं। सालों बाद आज भी हजारों की संख्या में लोग इस मस्जिद को देखने के लिए आते हैं। न सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में, बल्कि एक अद्भुत ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के उदाहरण के रूप में भी लोग इसे देखते हैं। 

 

ये सिर्फ पत्थरों से बनी इमारत नहीं है, बल्कि एक कहानी है जिसके कई किस्से हैं। जिसे देखने और जानने लोग आते हैं। इतना ही नहीं इसमें उन महिलाओं की भी कहानी छुपी है जिन्होंने अपने ख्वाबों को हकीकत में बदला।

 

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