मध्य प्रदेश का विदिशा जिला अपने अनूठे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए देश भर में जाना जाता है। राजधानी भोपाल से महज 56 किलोमीटर दूर स्थित यह शहर भारत के प्राचीन नगरों में से एक है, जिसकी पहचान हजारों वर्षों से इतिहास, पुरातत्व और धर्म से जुड़ी हुई है। जो कभी रोमांचित है। आइए जानते हैं आखिर क्या कुछ खास है।
इतिहास में विदिशा की जगह
विदिशा मामूली जिला नहीं बल्कि इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण और ब्रह्मपुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। इसका पुराना नाम भद्रावती था। इतना ही नहीं इसे कभी भिलसा के नाम से भी जाना जाता था। 1956 में इसे उसके ऐतिहासिक गौरव को देखते हुए ‘विदिशा’ नाम दिया गया।
ऐतिहासिक कथाओं के अनुसार, वैदिक काल में आर्य देवी ने यहां महिष नामक असुर को पराजित किया था, इसलिए आज भी यहां कुछ समुदाय महिषासुर की पूजा करते हैं। यही नहीं, विदिशा का संबंध सम्राट अशोक से भी रहा है। कहा जाता है कि लगभग 2600 वर्ष पहले, अशोक यहां के गवर्नर थे।
इतना ही नहीं विदिशा व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा करता था। आज भी यहां की खंडहरनुमा इमारतें और प्राचीन अवशेष इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग पहुंचते हैं।
धार्मिक और पर्यटन स्थल
विदिशा में कई धार्मिक और पुरातात्विक स्थल हैं, जो इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास हैं। आइए जानते हैं यहां पर घूमने लायक क्या है, जहां आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते हैं।
उदयगिरी की गुफाएं
विदिशा से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर उदयगिरी की गुफाएं है। जिसे एक पहाड़ी को काटकर बनाई गई हैं। यह जगह भगवान विष्णु के वराह अवतार के लिए प्रसिद्ध है। गुफाओं में विष्णु को सूअर के सिर वाले रूप में देखा जा सकता है। यहां लगभग 20 गुफाएं हैं। जो गुप्तकालीन शिल्पकला और धार्मिक आस्था को दर्शाती हैं।

नीलकंठेश्वर मंदिर
विदिशा में नीलकंठेश्वर मंदिर है। यह प्राचीन शिव मंदिर है। जिसे 11वीं सदी में परमारा राजा उदयादित्य द्वारा बनवाया गया था। इसके शिलालेखों से पता चलता है कि यह मंदिर 1059 से 1080 ई. के बीच बनाया गया हो। इसकी वास्तुकला उस काल की धार्मिक आस्था और स्थापत्य कला का उदाहरण है। यहां देश भर लोग आते हैं। खासकर सावन के महीने में यहां भक्तों का तांता लगता है।

गिरधारीलाल मंदिर
जिले में भगवान विष्णु का गिरधारीलाल मंदिर है। जिसे 16वीं सदी में चंदेल राजवंश ने बनवाया था। मंदिर की शिल्पकला और धार्मिक महत्व इसे विदिशा का प्रमुख स्थल बनाते हैं। यहां आप अपने परिवार के साथ घूमने आ सकेंगे है। कहते हैं यहां आकर मन को शांति मिलती है।
लोहांगी पहाड़
लोहांगी पहाड़ विदिशा शहर के बीचों-बीच स्थित है। जो ऊंची पहाड़ी अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए जानी जाती है। यहां से पूरे विदिशा शहर का खूबसूरत दृश्य देखने को मिलता है। जो हर पर्यटक को आकर्षित करता है। इस पहाड़ की चोटी से जब आप चारों ओर नजर डालते हैं, तो विदिशा का सुंदर नजारा आपकी आंखों के सामने बिखर जाता है। दूर-दूर तक फैली बेतवा नदी, उसके किनारे लगी हरी-भरी वृक्षों की श्रृंखला, रायसेन का किला, सांची की पहाड़ियां और उदयगिरि की गुफाएं यहां से एक दम साफ दिखाई देता है।
इतना ही नहीं यहां से शहर के छोटे-छोटे घर, रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाके भी बेहद सुंदर दिखाई देते हैं। खासकर सूर्यास्त के समय का दृश्य काफी मनमोहक होता है। जब आसमान रंग-बिरंगे रंगों से भर जाता है।
