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राजगढ़ की ऐतिहासिक: 16 खंभों वाली इमारत

राजगढ़ की ऐतिहासिक: 16 खंभों वाली इमारत

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में कई जगह देखने और जानने वाली है। अगर इसके इतिहास की बात करें  तो सन 1948 में राजगढ़ जिला बना था। वैसे तो इस जिले के कई धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व हैं। लेकिन आज हम आपको 16 खंभों वाली इमारत के बारे में बताएंगे। 

राजगढ़ जिले में स्थित नरसिंहगढ़ को ‘मालवा का कश्मीर’ कहा जाता है। इसे यूंही ऐसा नहीं कहते हैं ये क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के लिए भी जाना जाता है। नरसिंहगढ़ से लगभग 10 किलोमीटर दूर कोठरा विहार नाम का एक गांव है। जहां  एक अनोखी और रहस्यमयी इमारत है। इस इमारत का नाम ’16 खंभों वाली इमारत है‘। नाम सुन कर आप सोच रहे हैं होंगे की इसके 16 खंभे होंगे इसलिए उसे ये नाम दिया गया है। लेकिन आप को बता दें कि, यह जगह के पीछे कई ऐतिहासिक घटनाएं छिपी हुई है। जो इसे खास बनाती हैं।

 

परमार काल की धरोहर

जानकारी के अनुसार,  यह इमारत 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच परमार वंश के शासकों द्वारा बनवाई गई थी। ये  इमारत 16×16 यानी कुल 256 खंभों पर आधारित है। जसकी वजह से इसे 16 खंभी कहा जाता है। आपको बता दें कि, यह राजगढ़ जिले की प्रमुख ऐतिहासिक संरचनाओं में से एक मानी जाती है।

 

ये है इमारत की सबसे चर्चित कहानी

अगर हम इस इमारत की सबसे चर्चित कहानी की बात करें तक वो 16वीं शताब्दी की है। जब यहां राजा श्याम सिंह का शासन हुआ करता था। लोककथाओं की माने तो, इस इमारत के अंदर बारूद जलाया जाता था। जिससे जो आग का गोला या ‘तारा’ उठता था, वह इतना तेज और विशाल होता था कि दिल्ली तक दिखाई देता था। इस समय दिल्ली पर मुगलों का शासन हुआ करता था। जब मुगल बादशाह ने  इस ‘आग के तारे’ को देखा, तो वह चौंक गए और जानना चाहा कि आखिर ऐसा कौन-सा राजा है, जिसकी शक्ति का संकेत दिल्ली तक पहुंच रहा है। 

फिर क्या था, बादशाह ने जानने के लिए तुरंत एक बड़ी फौज तैयार कर डाली। और राजगढ़ की ओर कूच कर दिया। इस दौरान राजा श्याम सिंह ने बहादुरी से मुगल सेना का सामना किया, लेकिन सैनिक की संख्या और शक्ति अधिक  होने के कारण उनकी सेना हार गई। इसके बाद मुगल सैनिकों ने इस ऐतिहासिक इमारत को क्षतिग्रस्त कर दिया। बाद में इस स्मारक को पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले लिया और इसे संरक्षित घोषित कर दिया गया।

 

खतरे में है ये धरोहर

आज भी यह इमारत पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। लेकिन संरक्षण की कमी और स्थानीय असामाजिक तत्वों की वजह से इसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इमारत की दीवारों और खंभों में तोड़फोड़ की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। यहां तक कि स्मारक के भीतर भी छेड़छाड़ की जा चुकी है।  

 

सिर्फ पर्यटन नहीं, विरासत का प्रतीक है 16 खंभी

खूबसूरत वादियों के बीच स्थित यह ऐतिहासिक स्थल केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास है। ये इमारत उस शौर्यगाथा का गवाह है जहां राजा श्याम सिंह ने अपनी मिट्टी और विरासत की रक्षा के लिए मुगल साम्राज्य से लोहा लिया था। यह इमारत आज भी आने वाले पर्यटकों को उस स्वाभिमान, गौरव और बलिदान की कहानी सुनाती है। अगर आप अब तक यहां नहीं गए हैं तो एक बार जरूर जाइए।

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