मध्य प्रदेश का बैतूल न केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है बल्कि धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण भी इसकी एक खास पहचान है। सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखला में स्थित यह जिला जैन तीर्थ मुक्तागिरी, बालाजीपुरम मंदिर, सालबर्डी शिवगुफा और कुकरू जैसी ऊंची पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है।
यहां की शांति, हरियाली, प्राचीन मंदिर और जनजातीय संस्कृति देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। साथ ही, बैतूल जिला भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। इस जिले में कई जगह घूमने लायक हैं। तो आइए जानते हैं जिले की खास जगह के बारे में।
बालाजीपुरम मंदिर
बैतूल से सिर्फ 7 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-69 पर स्थित यह भव्य मंदिर है। जो भगवान बालाजी को समर्पित है। यहां रामायण प्रसंगों पर आधारित मूर्तियां भी बनी हुई हैं। वैष्णो देवी मंदिर, मानव निर्मित झरना और मंदाकिनी नदी जैसे आकर्षण इसे एक खास तीर्थ स्थल बनाते हैं। इसके साथ ही यहां हर साल वसंत पंचमी पर विशाल मेला लगता है।
ताप्ती उद्गम (मुलताई)
मुलताई मां ताप्ती नदी का उद्गम स्थल है। यह मंदिर स्कंद पुराण में वर्णित है। आपको बता दें कि, इसे धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र माना जाता है। ताप्ती को सूर्य की पुत्री और शनि की बहन कहा गया है, जिससे शनि दोष से मुक्ति मिलती है। यह नदी 724 किमी लंबी है और सूरत से होकर अरब सागर में गिरती है।
सालबर्डी शिवगुफा
ये गुफा प्रभातपट्टन विकासखंड के सालबर्डी गांव में स्थित है। यह प्राचीन गुफा भगवान शिव को समर्पित है। यहां का शिवलिंग प्राकृतिक जलधारा से निरंतर अभिषेकित होता है। शिवरात्रि पर यहां एक सप्ताह तक चलने वाला विशाल मेला लगता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। कहा जाता है कि यह गुफा पचमढ़ी तक जाती है।
कुकरू
कुकरू बैतूल जिले की सबसे ऊंची चोटी है। जो 1137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थल प्राकृतिक सुंदरता, शानदार सूर्यास्त के दृश्य और घने जंगलों से घिरा हुआ है। यह क्षेत्र कोरकू जनजाति का निवास स्थान भी है।
मुक्तागिरी जैन तीर्थ
भैंसदेही विकासखंड में स्थित मुक्तागिरी, सतपुड़ा के जंगलों में बसा हुआ है और दिगंबर जैन संप्रदाय के 52 मंदिरों का केंद्र है। यह जगह धार्मिक शांति, प्राचीन वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। यह स्थान जिला मुख्यालय से लगभग 102 किमी दूर है।
बैतूल के प्रसिद्ध हस्तशिल्प
बैतूल जिले की पहचान जरी- जरदोजी और ढोकरा शिल्प जैसे पारंपरिक हस्तशिल्पों से भी जुड़ी हुई है। यहां के जनजातीय कारीगर सदियों से इन कलाओं को सहेजते आ रहे हैं। आप यहां अगर आते हैं तो आपको सालों पुराना इतिहास देखने को मिलेगा।
बैतूल की ऐतिहासिक विरासत
बैतूल ब्रिटिश शासन के खिलाफ आदिवासी जागरूकता के लिए जाना जाता है। बंजारीदल गांव के शहीद विष्णु सिंह गोंड जैसे स्वतंत्रता सेनानी और नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेने वाले 50 से अधिक स्वयंसेवक जिले के गौरव को दर्शाते हैं।
बैतूल आने का सबसे अच्छा समय
यहां घूमने का सबसे उत्तम समय अक्टूबर से मार्च और मानसून में जुलाई से सितंबर का माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर होती है।
बैतूल कैसे पहुंचें?
इतना सब जानने के बाद आप सोच रहे होंगे कि आखिर बैतूल कैसे पहुंचे? तो हम आपको बता देते हैं। यहां आने के लिए आप हवाई मार्ग से निकटतम हवाई अड्डा नागपुर (180 किमी) और भोपाल (190 किमी) है। जहां से आप रेल मार्ग या तो सड़क मार्ग से यहां आ सकते हैं।