सरकारी दफ्तर में बैठकर सब रजिस्ट्रार का काम कर रहे निजी युवक, सीहोर के उप पंजीयक कार्यालय में नियमों की अनदेखी
सीहोर के उप पंजीयक कार्यालय में दो निजी युवकों से रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच, मेकर-चेकर संबंधी कार्य और क्रेता-विक्रेताओं की पहचान प्रक्रिया में जैसे कार्य कराए जा रहें है। जिला पंजीयक प्रेमनंदन सिंह ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

SehoreNews: सरकारी दफ्तरों में अफसरों की मनमानी इस कदर बढ गई है कि वह उनके मनमुताबिक ही काम हो रहा है मानो नियम कायदों की कोई जरूरत ही नहीं हो। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस काम के लिए जिन अधिकारियों को नियुक्त किया है उन्होंने निजी कामगारों का यह काम सौंप दिया है, ताजा मामला सिहोर जिले के उप पंजीयक कार्यालय का है। जहां सब रजिस्ट्रार का काम निजी युवक कार्यालय में बैठककर रहे हैं। जबकि यहा पर जमीन संबंधी गोपनीय दस्तावेज होते हैं। ऐसे में जिम्मेदार अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खडे हो रहे हैं।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में निजी युवकों की भूमिका पर सवाल
जानकारी के अनुसार, सीहोर स्थित उप पंजीयक कार्यालय में धर्मेंद्र दांगी और गणेश मीणा नाम के दो निजी युवकों से मेकर-चेकर से संबंधित कार्य कराए जा रहें है। वे कार्यालय के कंप्यूटर पर रजिस्ट्री दस्तावेज खोलकर उनका अवलोकन करते हैं। इसके अलावा, रजिस्ट्री कराने पहुंचने वाले क्रेता-विक्रेताओं के फोटो लेने और आंखों की आइरिस स्कैनिंग की प्रक्रिया में भी भूमिका निभाते है।
सरकारी कार्यों में निजी कर्मचारियों की तैनाती पर सवाल
नियमानुसार, रजिस्ट्री से संबंधित आधिकारिक प्रक्रियाओं का संचालन अधिकृत अधिकारियों और कर्मचारियों के दायित्वों के अनुरूप होना चाहिए। रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन और संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में यदि निजी व्यक्तियों से संवेदनशील शासकीय कार्य कराए जा रहे हैं, तो उनकी नियुक्ति, कार्यक्षेत्र और अधिकृत अनुमति की जांच आवश्यक है।
जिला पंजीयक ने कही जांच कराने की बात
मामले पर जिला पंजीयक प्रेमनंदन सिंह का कहना है कि निजी व्यक्तियों से शासकीय कार्य कराना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है।
अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि निजी युवकों को उप पंजीयक कार्यालय में किस आधार पर काम करने की अनुमति दी गई, उन्हें रजिस्ट्री से जुड़े संवेदनशील कार्य किसके निर्देश पर सौंपे गए और इस दौरान शासन के निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।
