Raisen District Hospital: रायसेन जिला अस्पताल से 'गायब' हुए नए शव वाहन, कंपनी ने पुराने वाहन किए तैनात
Raisen District Hospital: रायसेन जिला अस्पताल को पिछले साल मिले दो नए निशुल्क शव वाहनों को कुछ महीनों बाद कंपनी ने वापस ले लिया। उनकी जगह पुराने वाहन तैनात किए गए हैं। इनमें से एक वाहन खराब पड़ा है, जबकि दूसरे में भी हाल ही में तकनीकी खराबी आई थी।
Raisen District Hospital: रायसेन। रायसेन जिला अस्पताल में शव परिवहन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल को करीब एक साल पहले मिले दो नए निशुल्क शव वाहनों को कुछ ही महीनों बाद कंपनी ने वापस ले लिया। इसके बाद उनकी जगह पुराने वाहन तैनात कर दिए गए। अब मौजूदा स्थिति यह है कि दोनों पुराने वाहनों में से एक खराब पड़ा है, जबकि दूसरे वाहन में भी हाल ही में तकनीकी खराबी सामने आ चुकी है। ऐसे में जिले के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से शवों को अस्पताल या उनके घर तक पहुंचाने की निशुल्क सेवा प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
एक साल पहले मिले थे दो नए शव वाहन
बताय जा रहा है कि, 31 जुलाई 2025 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने जिला अस्पताल परिसर में दो नए शव वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। उस समय कहा गया था कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शुरू की गई इस निशुल्क सेवा का लाभ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध कराने और शवों को सम्मानजनक तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की बात कही गई थी।
कुछ महीनों बाद बदल दिए गए नए वाहन
जानकारी के तहत, नए शव वाहन मिलने के कुछ समय बाद कंपनी ने दोनों वाहनों को वापस ले लिया और उनकी जगह पुराने वाहन उपलब्ध करा दिए। अब इन्हीं वाहनों के जरिए जिले के ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में शव परिवहन की सेवा दी जा रही है।
अभी के समय पर इनमें से एक वाहन खराब हालत में खड़ा है। वहीं, कुछ दिन पहले दूसरे वाहन में भी तकनीकी खराबी आने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में जरूरत के समय शव वाहन उपलब्ध कराने को लेकर परेशानी की स्थिति बन सकती है।
108 एंबुलेंस और शव वाहन सेवा के नोडल अधिकारी डॉ. एमडी भारती ने बताया कि जिस समय नए वाहनों को बदला गया था, उस समय वे नोडल अधिकारी नहीं थे। अब उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी मिली है और मामला उनके संज्ञान में आया है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रोजेक्ट हेड से भी चर्चा की गई है। उनके अनुसार, जिला अस्पताल को मिले नए शव वाहन पूरी तरह नई और बेहतर स्थिति में थे, लेकिन बाद में उन्हें बदल दिया गया। फिलहाल एक वाहन खराब है, जबकि दूसरे वाहन में भी हाल ही में तकनीकी समस्या सामने आई थी।
निशुल्क सेवा के संचालन पर उठ रहे सवाल
शव वाहन सेवा का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बिना किसी शुल्क के शव को उनके घर तक पहुंचाने में मदद करना है। ऐसे में नए वाहनों की जगह पुराने वाहन लगाए जाने और उनमें से एक के खराब होने से सेवा की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित कंपनी खराब वाहन को कब तक दुरुस्त कराते हैं और नए वाहनों को वापस सेवा में लाने को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।