स्वामित्व योजना: पटवारियों का विरोध खत्म, 12 अक्टूबर से काम पर वापसी
मुख्यमंत्री मोहन यादव से बातचीत के बाद पटवारी संघ 12 अक्टूबर से स्वामित्व योजना का काम शुरू करेगा। जानें किन मांगों पर बनी सहमति।

मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना को लेकर सरकार और पटवारी संघ के बीच चला टकराव खत्म हो गया है। शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद संघ ने 12 अक्टूबर से योजना का काम फिर शुरू करने का फैसला किया। पटवारी अपनी मांगों के लिए सामूहिक अवकाश पर थे, जिससे योजना में जमीनों के पंजीयन का काम अटका हुआ था।
क्या थीं पटवारियों की मांगें
पटवारियों की सबसे बड़ी मांग थी कि जमीन के पंजीयन से जुड़े विवादों में उन्हें कानूनी सुरक्षा मिले। साथ ही आंदोलन के दौरान हुई विभागीय कार्रवाई वापस ली जाए और वेतन की दिक्कतें दूर हों, यह मांग भी रखी गई थी। मुख्यमंत्री के साथ बैठक में इन पर सहमति बनी, तो काम पर लौटने का रास्ता खुला।
कानूनी सुरक्षा के लिए निकलेंगे आदेश
पटवारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना में काम करने वाले पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने के लिए जरूरी आदेश जारी होंगे। पटवारियों को डर था कि जमीन के रिकॉर्ड या पंजीयन पर कोई विवाद हुआ, तो उन पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसीलिए संघ सुरक्षा के साफ नियम बनाने की मांग उठाता रहा।
बैठक में 17 सितंबर के बाद पटवारियों पर हुई विभागीय कार्रवाई वापस लेने पर भी सहमति बनने की बात सामने आई है। फिर भी इन फैसलों के लिए सरकारी आदेश निकलना जरूरी है, इसलिए कार्रवाई वापसी और कानूनी संरक्षण की असल तस्वीर आदेश आने के बाद ही साफ होगी।
वेतन विसंगति पर 27 अक्टूबर को घोषणा का आश्वासन
वेतन विसंगति और बाकी आर्थिक मांगों पर भी मुख्यमंत्री से बात हुई। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर के मुताबिक सरकार ने इन पर सकारात्मक रवैया दिखाया है। वेतन विसंगति पर आयोग बनने के बाद आगे विचार करने की बात कही गई है। साथ ही 27 अक्टूबर को होने वाले पटवारियों के महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा का आश्वासन भी मिला है। अब पटवारी संघ की नजर सरकार के अगले कदम पर है।
कार्रवाई के बाद गहराया था विवाद
स्वामित्व योजना का काम पूरा कराने को लेकर बीते कुछ दिनों से सरकार और पटवारियों के बीच तनातनी थी। उम्मीद के मुताबिक प्रगति न होने पर सरकार ने कई जिलों में कार्रवाई की। 8 अक्टूबर की नईदुनिया रिपोर्ट के अनुसार सात जिलों में 27 प्रोबेशनर पटवारियों की सेवाएं खत्म की गईं। विरोध में पटवारी संघ ने सामूहिक अवकाश पर जाने और सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने का फैसला किया था।
मामला न सुलझने पर संघ के पदाधिकारी उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिले। 9 अक्टूबर की इस बैठक के बाद भी संघ का कहना था कि मांगें पूरी होने तक काम पर नहीं लौटेंगे। फिर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हुई बैठक में सहमति बनी और हालात बदल गए।
50 लाख संपत्तियों के पंजीयन का लक्ष्य
स्वामित्व योजना में गांवों की संपत्तियों का रिकॉर्ड बनाया जा रहा है और लोगों को उनकी संपत्ति के दस्तावेज दिए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में करीब 50 लाख संपत्तियों के पंजीयन का लक्ष्य है। योजना में पटवारियों की भूमिका अहम है, इसलिए उनके काम पर लौटने से प्रक्रिया फिर आगे बढ़ने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी बैठक की जानकारी साझा की। पटवारी संघ ने योजना का काम पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ाने का भरोसा दिया है। अब 12 अक्टूबर से काम शुरू होने और सरकार के वादों पर अमल का इंतजार है।
