‘नई नवेली’ में कॉमेडी-हॉरर का तड़का, बहू और रावण के कनेक्शन का रहस्य; पढ़ें पूरा रिव्यू
यामी गौतम धर की फिल्म ‘नई नवेली’ में नई बहू पर डायन होने का शक कहानी को हॉरर-कॉमेडी और रामायण काल के रहस्य तक ले जाता है। अनुराग ठाकुर की कॉमिक टाइमिंग मनोरंजन करती है, लेकिन दूसरे हाफ की कमजोर पटकथा फिल्म का असर कम कर देती है।


Nai Naveli Movie Review: एक नई बहू घर में खुशियां लेकर आती है, लेकिन जब उसी के इरादों पर सवाल उठने लगें, तो परिवार की कहानी रहस्य और रोमांच में बदल जाती है। यामी गौतम धर की फिल्म ‘नई नवेली’ इसी दिलचस्प विचार से शुरुआत करती है। फिल्म में पारिवारिक ड्रामा, कॉमेडी, हॉरर और रामायण काल से जुड़े रहस्यों को एक साथ पेश किया गया है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 18 मिनट है। हालांकि, अनोखी कहानी के बावजूद फिल्म हर मोड़ पर दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने में पूरी तरह कामयाब नहीं होती।
घर की बहू से शुरू हुआ शक
बता दें, फिल्म की कहानी मेरठ के एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। मोहिनी (यामी गौतम धर) शादी के बाद घर में आती है और अपने व्यवहार से परिवार के सदस्यों का दिल जीतने लगती है। लेकिन उसका देवर बंटू (अनुराग ठाकुर) उसकी अच्छाई को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाता। उसे भाभी के व्यवहार में कुछ ऐसा नजर आता है, जिससे वह मोहिनी को डायन समझने लगता है।
कहानी आगे बढ़ती है तो मोहिनी के पति राजा (आदिनाथ एम. कोठारे) से जुड़े रहस्य भी सामने आने लगते हैं। धीरे-धीरे पारिवारिक कहानी रामायण काल के पात्रों और रावण, मंदोदरी तथा भगवान राम से जुड़े संदर्भों तक पहुंच जाती है। काल शील पत्थर और रावण की वापसी चाहने वाली शक्तियां कहानी को पौराणिक मोड़ देती हैं।
यामी का गंभीर अंदाज, अनुराग की कॉमिक टाइमिंग
मोहिनी के किरदार में यामी गौतम धर रहस्य बनाए रखती हैं। उनके अभिनय में संयम दिखाई देता है, लेकिन कमजोर पटकथा के कारण किरदार को पूरी गहराई नहीं मिल पाती। दूसरी ओर, अनुराग ठाकुर बंटू के रूप में मनोरंजन करते हैं। भाभी को लेकर उनका शक और अजीबोगरीब अंदाज कई दृश्यों को मजेदार बनाता है। लक्ष्मण रेखा वाला प्रसंग खास तौर पर ध्यान खींचता है। आदिनाथ एम. कोठारे भावनात्मक दृश्यों में ठीक प्रदर्शन करते हैं, हालांकि उनके गुस्से वाले कुछ दृश्य दोहराव का एहसास देते हैं। सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ और सुष्मिता मुखर्जी समेत बाकी कलाकार भी कहानी को सहारा देते हैं।
पहले हाफ में मनोरंजन, दूसरे में कहानी उलझी
निर्देशक बालाजी मोहन फिल्म के शुरुआती हिस्से में कॉमेडी और सस्पेंस का अच्छा तालमेल बनाते हैं। परिवार के भीतर का तनाव और बंटू की शंकाएं कहानी को आगे बढ़ाती हैं। महिलाओं के आत्मविश्वास और सम्मान का मुद्दा भी फिल्म में शामिल है।
हालांकि, दूसरे हाफ में पौराणिक घटनाओं और अलौकिक शक्तियों पर जोर बढ़ने के साथ पटकथा की गति प्रभावित होती है। रावण और रामायण से जुड़े विचार आकर्षक हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल कहानी में पूरी तरह सहज नहीं लगता। कुछ हॉरर दृश्यों में डर की जगह जरूरत से ज्यादा नाटकीयता नजर आती है।
‘फटा पटाखा’ खींचता है ध्यान
जीवी प्रकाश कुमार का संगीत फिल्म के रंगीन और रहस्यमयी माहौल के अनुकूल है। ‘फटा पटाखा’ सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाला गाना बनता है, जबकि दूसरे गीत लंबे समय तक याद नहीं रहते। बैकग्राउंड म्यूजिक सस्पेंस बनाने में मदद करता है, लेकिन कमजोर दृश्यों की कमियों को पूरी तरह ढक नहीं पाता।
नया कॉन्सेप्ट, लेकिन अधूरा असर
‘नई नवेली’ की खासियत इसका अनोखा आइडिया और यामी-अनुराग की जोड़ी है। फिल्म का पहला हिस्सा मनोरंजन करता है, मगर दूसरे हाफ में बिखरती कहानी इसका प्रभाव कम कर देती है। हॉरर-कॉमेडी और पौराणिक रहस्यों का मेल पसंद करने वाले दर्शकों को इसमें कुछ दिलचस्प पल मिल सकते हैं, लेकिन मजबूत पटकथा की कमी खलती है।
