MP News: मध्य प्रदेश नर्सिंग छात्रों की परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, CBI से ‘ग्रीन चेक’ वाले कॉलेजों में ही परीक्षा
MP News: मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और गुणवत्ता को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की परीक्षा को लेकर स्थिति साफ कर दी है।
MP News: मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और सुविधाओं को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की परीक्षा को लेकर अहम व्यवस्था बताई है। कोर्ट के मुताबिक, जिस कॉलेज को CBI की जांच में ‘ग्रीन चेक’ यानी उपयुक्त होने की मंजूरी मिलेगी, वहां के छात्र उसी संस्थान में परीक्षा दे सकेंगे। वहीं जिन कॉलेजों को CBI की जांच में हरी झंडी नहीं मिलती है, उनके छात्रों की परीक्षा दूसरे संस्थानों में कराने की व्यवस्था की जाएगी।
कॉलेज की स्थिति के आधार पर तय होगी परीक्षा व्यवस्था
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने मुख्य चिंता यह रही कि कॉलेजों की जांच और मान्यता से जुड़े विवाद का असर छात्रों की परीक्षा पर न पड़े। इसी संदर्भ में CBI की जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा केंद्र तय करने की बात सामने आई। यानी जिन संस्थानों को जांच में उपयुक्त पाया जाएगा, वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपने ही कॉलेज में परीक्षा देने का मौका मिलेगा। जिन संस्थानों की स्थिति जांच में संतोषजनक नहीं पाई जाती, उनके छात्रों को परीक्षा के लिए दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा।
जिसे फीस-डोनेशन दिया उससे सवाल करे: CJI
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने छात्रों से कहा कि उन्हें उस कॉलेज प्रबंधन से सवाल करना चाहिए, जिसे उन्होंने फीस, डोनेशन या अन्य शुल्क का भुगतान किया है। कोर्ट की टिप्पणी का केंद्र यह था कि यदि किसी कॉलेज को लगता है कि वह नियमों और निर्धारित मानकों के अनुरूप है, तो उसे CBI की जांच का सामना करना चाहिए। जांच में संस्थान की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
2020-21 और 2021-22 में दाखिला लेने वाले छात्रों का मामला
छात्रों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इन छात्रों ने 2020-21 और 2021-22 शैक्षणिक सत्र में दाखिला लिया था। उनके कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित समिति ने नियम और तय मानदंडों के अनुरूप पाया था। वकील ने कहा कि दाखिले के बाद से ही यह मामला कोर्ट की निगरानी में है और कॉलेजों का निरीक्षण भी कराया गया है। ऐसे में छात्रों को परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाना चाहिए।
130 कॉलेजों की CBI जांच पर लगी थी रोक
मप्र NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार के मुताबिक, मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए थे। उनके अनुसार ग्वालियर-चंबल संभाग के करीब 130 कॉलेजों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच पर रोक की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने के कारण इन कॉलेजों की CBI जांच नहीं हो सकी।
वहीं प्रदेश के अन्य नर्सिंग कॉलेजों की CBI जांच के बाद उन्हें सूटेबल, अनसूटेबल और डेफिशिएंट तीन श्रेणियों में रखा गया था।
8 से 10 हजार छात्रों पर असर का दावा
रवि परमार ने दावा किया कि ग्वालियर-चंबल संभाग के इन 130 नर्सिंग कॉलेजों में करीब 8 से 10 हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब या तो इन कॉलेजों की CBI जांच होगी या फिर छात्रों को उपयुक्त कॉलेजों में शिफ्ट किया जाएगा। इसी के आधार पर परीक्षा और परिणाम को लेकर आगे निर्णय होगा।
उन्होंने कहा कि CBI जांच के बाद फर्जी या नियमों के विपरीत पाए जाने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इससे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
31 अगस्त से पहले हाईकोर्ट में सुनवाई की मांग
सुनवाई के दौरान छात्रों के वकील ने कहा कि छात्र हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं और 31 अगस्त से पहले उनकी याचिका पर सुनवाई की मांग की जाएगी। अब छात्रों के लिए उनके कॉलेज की CBI जांच अहम हो गई है। कॉलेज जांच में उपयुक्त पाया गया तो छात्र वहीं से परीक्षा दे सकेंगे, जबकि जांच में उपयुक्त नहीं पाए जाने पर उन्हें दूसरे संस्थान में शिफ्ट किया जा सकता है।

