हाइलाइट्स
- एनएच-347बी परियोजना को वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस मिली
- टाइगर कॉरिडोर में वन्यजीवों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय
- यात्रा समय में 2 घंटे 25 मिनट की कमी संभव
- कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
Betul Khandwa highway : बैतूल। मध्यप्रदेश में बैतूल–खंडवा–देशगांव मार्ग पर बनने वाली एनएच-347बी परियोजना को वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस मिल गई है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
करीब 125 किलोमीटर लंबी यह सड़क बैतूल और खंडवा के वन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जिसमें लगभग 167 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा।
टाइगर कॉरिडोर से गुजरता है मार्ग
यह परियोजना सतपुड़ा–मेलघाट टाइगर कॉरिडोर से होकर गुजरती है, जहां बाघों की आवाजाही के महत्वपूर्ण क्षेत्र चिन्हित हैं। इसी कारण इसे वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत विशेष अनुमति की आवश्यकता थी, जो अब मिल चुकी है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान
परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कई विशेष उपाय किए गए हैं। कॉरिडोर में 7 अंडरपास बनाए जाएंगे, जिससे जानवर सुरक्षित रूप से आ-जा सकें। इसके अलावा 10 बड़े और 57 छोटे पुल बनाए जाएंगे, ताकि प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित न हो।
संवेदनशील क्षेत्रों में 2.6 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर और 4.5 किलोमीटर नॉइज़ बैरियर भी बनाए जाएंगे। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण के लिए अलग से राशि भी निर्धारित की गई है।
बेहतर कनेक्टिविटी और समय की बचत
यह हाईवे बनने के बाद बैतूल और खंडवा के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। परियोजना में बाईपास भी शामिल किए गए हैं, जिससे शहरों में ट्रैफिक कम होगा।
इस मार्ग पर यात्रा का समय करीब 2 घंटे 25 मिनट तक कम होने की संभावना है। इससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों को लाभ मिलेगा।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
परियोजना के पूरा होने पर ईंधन की खपत कम गी, जिससे लागत में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, खासकर आदिवासी और दूरस्थ इलाकों को फायदा होगा।
सतत विकास का उदाहरण
एनएच-347बी परियोजना को विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का उदाहरण माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ यह परियोजना सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।