हाइलाइट्स
- 3938 करोड़ का बजट महापौर मालती राय ने सदन में पेश किया
- सुरक्षा निधि के कारण संभावित घाटा भी दर्ज किया गया
- टैक्स में सीधा इजाफा नहीं, लेकिन परिसीमन शुल्क बढ़ सकता है
- गोमांस मुद्दे पर सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष में तीखी बहस
Nagar Nigam budget 2026 : भोपाल। भोपाल में नगर निगम परिषद की बैठक के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया गया। महापौर मालती राय ने लगातार चौथी बार बजट प्रस्तुत किया।
इस बार नगर निगम का कुल बजट ₹3938 करोड़ 45 लाख 28 हजार प्रस्तावित किया गया है, जिसमें आय और व्यय दोनों शामिल हैं।
बजट को Madhya Pradesh Municipal Corporation Act 1956 Budget Provision की धारा 97(क) के तहत सदन में रखा गया।
बजट में 5% सुरक्षा निधि के रूप में ₹108 करोड़ 89 लाख 29 हजार का प्रावधान किया गया है, जिससे इसी राशि के बराबर संभावित घाटा भी सामने आया है।
विकास कार्य और अधूरे वादों पर सवाल
बैठक के दौरान शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले बजट में किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। हेरिटेज गेट, गीता भवन और अन्य विकास कार्य अब भी अधूरे हैं।
विपक्ष का कहना है कि बीते दो वर्षों से घोषित योजनाएं जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाई हैं, जबकि इस बार भी नए प्रस्ताव पेश किए गए हैं।
इस मुद्दे को लेकर सदन में बहस और सवाल-जवाब का दौर भी देखने को मिला।
टैक्स और आर्थिक प्रावधान
इस बजट में सीधे तौर पर नए टैक्स नहीं बढ़ाए गए हैं, लेकिन परिसीमन शुल्क बढ़ाने की तैयारी है, जिसका असर कुछ उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
पिछले वित्तीय वर्ष में प्रॉपर्टी टैक्स में 10% और जलकर तथा ठोस अपशिष्ट शुल्क में 15% की वृद्धि की गई थी। इससे भोपाल के लाखों नल कनेक्शन और प्रॉपर्टी टैक्स उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।
सदन में गोमांस मुद्दे पर हंगामा
बैठक के दौरान गोमांस और स्लॉटर हाउस से जुड़े मुद्दे पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को उठाते हुए जवाब मांगा, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
सदन में नई पार्किंग व्यवस्था और कंडम वाहनों को हटाने जैसे प्रस्ताव पारित किए गए, जबकि लिगेसी वेस्ट हटाने का प्रस्ताव पास नहीं हो सका।
भोपाल नगर निगम का यह बजट विकास योजनाओं, अधूरे वादों और टैक्स नीतियों को लेकर चर्चा में रहा। जहां एक ओर बजट में बड़े प्रावधान किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने कई सवाल उठाकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।