MP Suicide Case : मध्य प्रदेश। इंदौर शहर में आर्थिक तनाव और कर्ज के बोझ से आत्महत्या के प्रयासों के मामले थम नहीं रहे हैं। सोमवार सुबह चंदन नगर इलाके के एक बुजुर्ग की एमवाय अस्पताल में मौत हो गई। उन्होंने ढाई लाख रुपए के कर्ज से परेशान होकर जहर खा लिया था।
वहीं, दूसरी तरफ छत्रीपुरा क्षेत्र में एक महिला ने महज 5 हजार रुपए के उधार को लेकर बुआ से झगड़े के बाद फांसी का फंदा लगाया, लेकिन परिवार वालों ने समय रहते बचा लिया। ये दोनों घटनाएं इंदौर में बढ़ते मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव की गंभीर तस्वीर पेश कर रही हैं।
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पहला मामला चंदन नगर पुलिस थाने का है। मृतक का नाम मंशाराम सिलोदरे (60) पुत्र बालमुकुंद है, जो राजनगर में रहते थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मंशाराम के बेटे धर्मेंद्र सिलोदरे ने बताया कि पिता मंगलवार को घर से निकले थे। परिवार उन्हें ढूंढ रहा था।
शुक्रवार रात जब वे घर लौटे तो हालत बेहद खराब थी। आनन-फानन में एमवाय अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच में पता चला कि उन्होंने जहर खाया था। इलाज के दौरान सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई।
धर्मेंद्र ने खुलासा किया कि पिता पर करीब ढाई लाख रुपए का कर्ज था। कर्जदार फोन पर लगातार पैसे मांगते थे और दबाव बनाते थे। घर आने की हिम्मत नहीं करते थे। पिता ने कभी कर्जदारों के नाम नहीं बताए।
बस इतना कहा कि “कर्ज मेरा है, मैं चुका दूंगा।” इसी को लेकर घर में पत्नी और बेटे से कई बार कहासुनी हो जाती थी। मंशाराम सिलाई का काम करते थे। उनका बेटा भी यही काम करता है। परिवार में पत्नी, बहू और दो पोते हैं। पिछले कुछ दिनों से वे बेहद तनाव में थे और चुपचाप रहने लगे थे।
दूसरा मामला छत्रीपुरा पुलिस का है। यहां 30 साल की सोनाली धाकड़ पति गोलू धाकड़ ने रविवार शाम आत्महत्या का प्रयास किया। वे पति से अलग रह रही हैं और माता-पिता के साथ रहती हैं।
सोनाली ने दो महीने पहले बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए अपनी मां की बुआ से 5 हजार रुपए उधार लिए थे। रविवार को बुआ रुपए मांगने घर आ गईं और झगड़ा शुरू हो गया। इससे परेशान होकर सोनाली ने घर में फांसी लगा ली।
परिवार वालों ने शोर मचाया और समय रहते फंदे से उतारकर एमवाय अस्पताल पहुंचाया। पिता ताराचंद उन्हें अस्पताल लेकर आए। डॉक्टरों ने बताया कि सोनाली की हालत अब खतरे से बाहर है।
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पुलिस सोमवार को अस्पताल जाकर उनके बयान दर्ज करेगी। पुलिस का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेना खतरनाक है। ऐसे मामलों में काउंसलिंग की जरूरत है।