MP Fertilizer Crisis : सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में रबी सीजन की बुवाई शुरू हो चुकी है। लेकिन किसानों को खाद की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी समितियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। रात भर जागकर लाइन में खड़े होने के बावजूद ज्यादातर किसान खाली हाथ लौट रहे हैं।
कभी-कभी घंटों की मशक्कत के बाद एक-दो बोरी ही नसीब होती है। यह संकट खेती को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। किसानों में हताशा इतनी बढ़ गई है कि कुछ ने तो जहर खाने की धमकी तक दे डाली है।
ताजा घटना बोरदी कलां गांव की है। यहां सैकड़ों किसान सहकारी समिति के बाहर रात भर लाइन में खड़े रहे। सुबह खाद वितरण शुरू होते ही हड़बड़ी मच गई। व्यवस्था बिगड़ गई तो पुलिस को बुलाना पड़ा। जवानों ने किसी तरह भीड़ को संभाला।
किसानों का कहना है कि आपूर्ति इतनी कम है कि सबकी मांग पूरी ही नहीं हो पा रही। जिले के आष्टा, इछावर और बुदनी ब्लॉक भी इसी दर्द से गुजर रहे हैं। खरीफ में सोयाबीन और धान की फसलें उगाने वाले किसान अब रबी में गेहूं-चना बोने को मजबूर हैं, लेकिन बिना खाद के बुवाई कैसे हो?
शासन-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
किसानों ने शासन-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि समितियों में खाद कम आ रही है, लेकिन बाजार में व्यापारी सरकारी दाम से दोगुना-तिगुना बेच रहे हैं। यूरिया की बोरी 266 रुपये की जगह 500 रुपये तक पहुंच गई है। डीएपी की जगह यूरिया थोप दिया जा रहा है।
एक किसान ने गुस्से में कहा, “खाद न दे सको तो सल्फास ही दे दो। रोज की यह जंग कब तक?” विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं। लाडकुई जैसे गांवों में पहले सड़क जाम हो चुके हैं। किसान संगठन एसडीएम को ज्ञापन दे चुके हैं।
MP News : उज्जैन में 3 ग्राम पंचायत सचिव निलंबित, जिला पंचायत CEO की सख्त कार्रवाई, लापरवाही का आरोप
जिला कृषि विभाग के अनुसार, सीहोर विंध्य पठार और नर्मदा घाटी क्षेत्र में आता है। यहां सालाना 1261 एमएम बारिश होती है। लेकिन खाद की मांग आपूर्ति से ज्यादा है। हाल ही में भैरूंदा और बुधनी में भी ताले लगे समितियों के बाहर किसान सड़कों पर उतर आए। महिलाएं और बुजुर्ग भी लाइनों में शामिल हो रहे हैं।
सरकार दावा करती है कि कमी नहीं है, लेकिन हकीकत जमीनी स्तर पर उजागर हो रही है। किसान चाहते हैं कि कालाबाजारी पर रोक लगे और तुरंत सप्लाई बढ़े। अन्यथा रबी फसल का नुकसान अपूरणीय होगा। यह संकट न सिर्फ सीहोर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए चिंता का विषय है।