Healthy Women Empowered Family Campaign Bhopal News : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार सशक्तिकरण के नाम पर शुरू हुआ ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान’ अब लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर को धार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लॉन्च किया गया था। यह अभियान 2 अक्टूबर तक चलना है।
अभियान महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत करने का वादा करता है लेकिन पांचवें दिन (22 सितंबर) सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा लेने पर डॉक्टरों से लेकर स्टाफ तक की अनुपस्थिति ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं। पहले दिन 140 केंद्रों पर 20 हजार जांच का दावा किया गया था, लेकिन अब अभियान बैनरों और कागजों तक सिमट गया लगता है।
अभियान का शानदार आगाज
17 सितंबर को पीएम मोदी ने धार से इस अभियान की शुरुआत की, जो 2018 से चली आ रही एक वार्षिक पहल है। इसका मकसद महिलाओं के लिए पहुंच, गुणवत्ता वाली देखभाल और जागरूकता बढ़ाना है, खासकर पोषण, एनीमिया, गर्भावस्था और कैंसर जैसी समस्याओं पर। अभियान को आठवें राष्ट्रीय पोषण माह से जोड़ा गया है, ताकि स्वस्थ आदतों को जन आंदोलन बनाया जाए।
पहले दिन भोपाल में स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया कि 140 केंद्रों पर 20 हजार लोगों की जांच हुई, जिसमें महिलाओं के साथ पुरुषों को भी फायदा पहुंचाने पर जोर दिया गया। पीएम ने जनप्रतिनिधियों से अपील की थी कि वे खुद जांच कराएं और लोगों को केंद्रों पर लाएं। लेकिन पांच दिनों में ही यह उत्साह फीका पड़ गया, और अभियान की हकीकत सामने आ गई।
सोमवार को अभियान का पांचवां दिन था, जब सरकारी केंद्रों पर आंखों की समस्याओं (नेत्रहीनता नियंत्रण), बुजुर्गों की देखभाल, मुंह-दांत के रोग (ओरल हेल्थ) और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने का प्लान था। सीएमएचओ कार्यालय से आदेश जारी हुए थे कि इन क्षेत्रों में नियमित से ज्यादा फोकस हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही थी।
भोपाल के कई केंद्रों पर पहुंचने पर न केवल मरीजों की भीड़ गायब थी, बल्कि डॉक्टर और स्टाफ भी नदारद मिले। यह स्थिति न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि अभियान के मूल उद्देश्य – ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ को मजाक बना रही है।
कोलार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सन्नाटा
यह केंद्र मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते लोगों के लिए जाना जाता है, जहां मन कक्ष में डॉक्टर परामर्श देते हैं। पांचवें दिन मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस था, लेकिन सुबह साढ़े 11 बजे पहुंचने पर कक्ष पूरी तरह खाली मिला।
न डॉक्टर थे, न स्टाफ, और न ही कोई मरीज। एक स्थानीय महिला ने बताया, “हम तो सुबह से इंतजार कर रही थीं, लेकिन कोई नहीं आया। अभियान का प्रचार तो हुआ, लेकिन व्यवस्था कहां?” यह नजारा देखकर लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील समस्या पर भी विभाग सो रहा है।
1100 क्वार्टर संजीवनी क्लिनिक में जांच कक्ष बंद
दोपहर 12 बजे के करीब मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक पहुंचे तो नेत्र जांच कक्ष और नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (कैंसर) परामर्श कक्ष में ताला लगा था। स्टाफ गायब था, और मरीज भटक रहे थे। यहां सोमवार को नेत्रहीनता और कैंसर पर विशेष कैंप का प्लान था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
एक बुजुर्ग ने शिकायत की, “आंखों की जांच के लिए आए थे, लेकिन डॉक्टर तो छुट्टी पर लगते हैं।” ये केंद्र महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां एनीमिया और कैंसर स्क्रीनिंग होती है, लेकिन लापरवाही से ये सुविधाएं बेकार साबित हो रही हैं।