Betul Corruption : बैतूल, मध्य प्रदेश। भ्रष्टाचार का काला साया एक बार फिर ग्रामीण भारत पर मंडराने लगा है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की ठानी ग्राम पंचायत में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो ग्रामीणों के विश्वास को तोड़ रहा है। कलेक्टर की जनसुनवाई में ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। फोटोकॉपी से लेकर मनरेगा तक, हर कदम पर धन का गबन और काम की अनदेखी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
बैतूल जिले के आमला क्षेत्र में स्थित ठानी ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। 9 सितंबर 2025, मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं।
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आरोप है कि पंचायत ने एक साधारण फोटोकॉपी और प्रिंटआउट के लिए 170 रुपये प्रति कॉपी का बिल बनाकर सरकारी पैसे की लूट की। यह खुलासा सरकारी पोर्टल की जाँच से हुआ, जो इस गड़बड़ी की पोल खोलता है।
ग्राम बुचनवाड़ी में सीसी नाली निर्माण के लिए 6 लाख 17 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। फरवरी 2025 में इनमें से 3 लाख 88 हजार 900 रुपये निकाल लिए गए, लेकिन आज तक सितंबर 2025 में भी काम शुरू नहीं हुआ। इसी तरह, सोखता गड्ढे के लिए 77 हजार रुपये जारी किए गए, मगर गड्ढा बनाने का नामोनिशान नहीं है।
आंगनवाड़ी सुधार के लिए 1 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत हुए। ग्रामीणों का कहना है कि घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर सस्ते में काम निपटाया गया, जिससे सुधार का ढोंग रच दिया गया।
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मनरेगा में भी भ्रष्टाचार की पोल खुली। मजदूरों के फर्जी नाम मस्टररोल में डालकर भुगतान कर लिया गया, जो मेहनतकशों के साथ धोखा है। नल-जल योजना 2022-23 के तहत पाइपलाइन और ट्रांसफॉर्मर लगाने का दावा किया गया, लेकिन आज तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों की प्यास अधूरी रह गई।
पिछले 2-3 सालों से ग्राम सभा का आयोजन नहीं हुआ, फिर भी रिकॉर्ड में इसे दिखाया गया, जो पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। डिजिटल सेंटर पॉइंट के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान दर्शाया गया, लेकिन वहां कोई काम नहीं हुआ।
यह सारा खेल ग्रामीणों के भरोसे को तोड़ रहा है। कलेक्टर की जनसुनवाई में हुई शिकायतों के बाद अब जांच की उम्मीद जगी है, मगर ग्रामीणों में गुस्सा और निराशा साफ दिख रही है।