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रियासत से राजधानी तक, ये है भोपाल की कहानी

मध्य प्रदेश का सुंदर, शांत और झीलों का शहर भोपाल यूंही नहीं बना। जहां आज भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी है, वहीं एक वक्त ऐसा था जब इसे बनाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इसकी नींव सदियों पुरानी है। इसके इतिहास की शुरुआत गोंड राजवंश से हुई। 7वीं सदी में गोंड राजा भूपाल सिंह शाह सल्लाम ने 669-679 ईस्वी के बीच इस शहर की स्थापना की थी। उस समय इस शहर को ‘भूपाल’ नाम दिया गया था, जो आगे चलकर ‘भोपाल’ बना।

भोपाल उस समय एक प्रमुख गोंड रियासत की राजधानी था। लेकिन गोंड राजाओं के शासन के बाद यह क्षेत्र कई बार लुटेरों और बाहरी लोगों का शिकार हुआ। शहर की अस्थिरता और कमजोर होती सुरक्षा व्यवस्था ने इसे नए सत्ताओं के पास जाने को मजबूर किया।

 

दोस्त मोहम्मद खान की भूमिका

मुगल साम्राज्य के पतन के बाद एक अफगान सैनिक दोस्त मोहम्मद खान (1672–1728) ने मालवा क्षेत्र में अपनी पकड़ बनानी शुरू की। कहते हैं कि वह एक बहादुर सैनिक और रणनीतिकार था, जिसने भाड़े के सैनिक के रूप में स्थानीय रियासतों की मदद की। उन्हीं दिनों रानी कमलापति के पति राजा निज़ाम शाह की मौत हो गई थी। ऐसे में रानी ने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए दोस्त मोहम्मद खान को आमंत्रित किया। रानी की मौत के बाद खान ने उस छोटे गोंड राज्य पर कब्जा कर लिया और भोपाल गांव पर अधिकार कर लिया।

 

भोपाल राज्य की नींव

1720 से 1726 के बीच दोस्त मोहम्मद खान ने भोपाल को एक किलेबंद शहर में बना दिया। इसके बाद ‘नवाब’ की उपाधि ग्रहण कर ली। इस तरह भोपाल एक संगठित राज्य बन गया। दोस्त मोहम्मद खान ने मुगल दरबार में सैयद बंधुओं के साथ गठबंधन कर लिया। जिससे हैदराबाद के निज़ाम मीर क़मर-उद-दीन से उसकी दुश्मनी हो गई। और 1724 में निज़ाम ने भोपाल पर आक्रमण कर दिया। जिसमें  दोस्त मोहम्मद को पराजय स्वीकार करनी पड़ी।

 

मराठा और ब्रिटिश प्रभाव

भोपाल का माहौल यहीं शांत नहीं हुआ। सन 1737 में पेशवा बाजीराव प्रथम के नेतृत्व में मराठा सेना ने भोपाल पर आक्रमण किया। जिसमें मुगलों को हरा दिया। इसके बाद भोपाल मराठा के हाथ में आ गया। लेकिन 1818 के तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध के बाद नवाबों ने ब्रिटिश सरकार के साथ एक संधि की और भोपाल एक ब्रिटिश रियासत बन गया।

 

नवाबों का शासन 

दोस्त मोहम्मद खान के बेटे नवाब यार मोहम्मद खान ने इस्लामनगर को राजधानी बनाया। लेकिन उनके उत्तराधिकारी नवाब फैज़ मुहम्मद खान ने राजधानी को फिर भोपाल स्थानांतरित कर दिया। इस काल में ममोला बाई जैसे प्रभावशाली महिलाओं ने भी शासन में एक अहम भूमिका निभाई। भोपाल के इतिहास में महिलाओं का विशेष स्थान रहा है। राजा निज़ाम शाह की पत्नी रानी कमलापति ने न केवल अपने राज्य को सहेजा बल्कि भोपाल के विकास में भी योगदान दिया। उनकी याद में आज कमला पार्क और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन मौजूद हैं।

 

स्वतंत्रता और विलय

1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद भोपाल की आखिरी वारिस आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गईं। उनकी बहन साजिदा सुल्तान को रियासत की उत्तराधिकारी बनाया गया। आखिर में 1 जून 1949 को भोपाल राज्य भारत में विलय कर दिया गया। यह एक भारतीय राज्य का हिस्सा बन गया।

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