हाइलाइट्स
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रायसेन के वनगवां गांव में ‘वीर बम बोल’ परंपरा का आयोजन
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धूलेंडी पर मेघनाथ बाबा की पूजा के साथ कार्यक्रम शुरू
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25 फीट ऊंचाई पर खंभों के बीच बकरे को घुमाया जाता है
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वीरता की पहचान के लिए युवाओं को कोड़े मारने की परंपरा
Raisen News : रायसेन। जिले के वनगवां गांव में होली के अवसर पर एक अनूठी और सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘वीर बम बोल’ के नाम से जाना जाता है। यह परंपरा धूलेंडी के दिन शाम करीब 6 बजे से शुरू होती है, जब ग्रामीण मेघनाथ बाबा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

इस परंपरा के तहत पूजा स्थल पर लगाए गए दो लोहे के खंभों के बीच करीब 25 फीट की ऊंचाई पर एक बकरे को बांधकर घुमाया जाता है। स्थानीय लोग मेघनाथ बाबा को ‘वीर बब्बों’ के नाम से भी पुकारते हैं। यह अनोखा आयोजन गांव की आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
वीरता की पहचान के लिए कोड़े मारने की परंपरा
इस आयोजन का एक और खास हिस्सा युवाओं को कोड़े मारना है। ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा पुराने समय में गांव की रक्षा करने वाले वीर युवाओं की पहचान के लिए शुरू की गई थी।
माना जाता है कि जो युवक समाज और गांव की सुरक्षा के लिए आगे आते हैं, उन्हें कोड़े मारकर उनकी वीरता का प्रतीकात्मक सम्मान किया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान कोड़े खाने वाले लोगों को कोई गंभीर चोट नहीं लगती और शरीर पर स्थायी निशान भी नहीं पड़ते।

100 साल से निभाई जा रही परंपरा
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार यह परंपरा 100 वर्षों से भी अधिक समय से गांव में निभाई जा रही है। हलारिया कुर्मी पटेल परिवार पीढ़ियों से मेघनाथ बाबा की पूजा-अर्चना और इस आयोजन की जिम्मेदारी निभा रहा है।
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आसपास के गांवों से भी पहुंचते हैं लोग
इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए वनगवां के अलावा आसपास के करीब 10 गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। समय के साथ यह आयोजन गांव की पहचान बन चुका है।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के जिला अध्यक्ष सीएल गौर, जनपद सदस्य नितेश पटेल, पूर्व सरपंच मुन्नालाल गौर सहित कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।