हाइलाइट्स
- OBC आरक्षण केस की सुनवाई में MP सरकार की ओर से नहीं पहुंचा कोई वकील।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत 6 वरिष्ठ वकील नियुक्त फिर भी गैरहाजिरी।
- हाईकोर्ट से ट्रांसफर केस, कोई स्टे नहीं फिर भी सरकार टाल रही।
Supreme Court on OBC Reservation : भोपाल। मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण देने से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की बड़ी लापरवाही सामने आई। गुरुवार को जब मामले सुनवाई के लिए बुलाए गए, तब मध्य प्रदेश सरकार की ओर से एक भी अधिवक्ता कोर्ट में मौजूद नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और इसे गंभीर आचरण बताया। कोर्ट ने खेद भी प्रकट किया।
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106 नंबर पर सूचीबद्ध थे मामले
न्यायमूर्ति नरसिंहा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण सीरियल नंबर 106 पर अंतिम बहस के लिए सूचीबद्ध थे। जैसे ही मामलों को कॉल किया गया, सरकार की ओर से कोई वकील नहीं पहुंचा।
तुषार मेहता समेत 6 वकील नियुक्त
ओबीसी वर्ग के सीनियर एडवोकेट अनूप चौधरी ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत पांच अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त कर रखा है। इसके बावजूद सुनवाई के दिन एक भी वकील कोर्ट में नहीं था। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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हाईकोर्ट से ट्रांसफर करवाए केस
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करवा दिए थे। आरोप है कि 27% आरक्षण लागू करने के दबाव से बचने के लिए ऐसा किया गया। सरकार भर्ती विज्ञापनों में ओबीसी को 27% आरक्षण देने की बात तो करती है, लेकिन नियमों के विरुद्ध 13% पद होल्ड किए जा रहे हैं।
कोई स्टे नहीं फिर भी टालमटोल
महत्वपूर्ण बात यह है कि ओबीसी को 27% आरक्षण देने वाले कानून पर न हाईकोर्ट ने स्टे दिया है और न ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। इसके बावजूद सरकार पिछले एक साल से अधिक समय से सुनवाई में केवल तारीख पर तारीख लेती आ रही है। पहले हर पेशी पर महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और एक दर्जन विधि अधिकारी समय मांगते रहे, लेकिन गुरुवार को वे भी कोर्ट में नहीं पहुंचे।
ओबीसी पक्ष के वकील पहुंचे
ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी, जून चौधरी, रामेश्वर सिंह ठाकुर और वरुण ठाकुर कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रकरण की गंभीरता से कोर्ट को अवगत कराया।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार की ओर से कोई अधिवक्ता मौजूद नहीं है, ऐसे में सुनवाई कैसे हो सकती है। कोर्ट ने इस रवैये पर खेद जताया।
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अगली सुनवाई 4 फरवरी को
ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं के अनुरोध पर अब इन मामलों की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्ती से निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई में जरूर वकील उपस्थित रहें। ओबीसी समाज में नाराजगी बढ़ रही है। सरकार पर आरक्षण लागू करने में देरी का आरोप लग रहा है।