हाइलाइट्स
- उमंग सिंघार ने हनुमान जी को आदिवासी बताया।
- आदिवासी समाज हनुमान जी को वंशज मानता है।
- गोंडी धर्म ग्रंथ का हवाला दिया।
Umang Singhar Statement : भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भगवान हनुमान जी को आदिवासी बताकर नया विवाद खड़ा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि हनुमान जी आदिवासी थे। जिन लोगों को इस पर शंका है, वे गोंडी धर्म ग्रंथ के पृष्ठ 10 को देखें।
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ग्रंथ का हवाला
उमंग सिंघार ने लिखा कि वे प्रमाणों और ग्रंथों के आधार पर बात रखते हैं। गोंडी धर्म ग्रंथ खुद इस बात की पुष्टि करता है कि सुग्रीव, अंगद, बाली और हनुमान जी कौन थे। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ आदिवासी संस्कृति और इतिहास को दर्शाता है।
आदिवासी अस्मिता पर जोर
उमंग सिंघार पहले भी कई बार हनुमान जी को आदिवासी बता चुके हैं। उन्होंने कहा कि रामायण में वानर सेना को आदिवासी योद्धा बताया गया है। लेकिन कथाकारों ने उन्हें वानर के रूप में पेश किया। आदिवासी समाज हनुमान जी को अपने वंशज मानता है। गांव-गांव में उनके मंदिर और पुजारी हैं।
सोशल मीडिया पर पोस्ट
उमंग सिंघार ने सोशल साइट पर यह पोस्ट किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि ग्रंथ पढ़ें और समझें। उनका कहना है कि आदिवासी अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करते हैं। कोई भी इनसे समझौता नहीं करेगा।
राजनीतिक बहस तेज
यह बयान मध्य प्रदेश में आदिवासी अस्मिता और धार्मिक पहचान को लेकर बहस तेज कर रहा है। कांग्रेस नेता आदिवासी समाज को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी ऐसे बयान दिए गए थे। अब गोंडी ग्रंथ का जिक्र करके उन्होंने प्रमाण दिए हैं।
आगे क्या होगा
यह मुद्दा आदिवासी वोट बैंक पर असर डाल सकता है। लोग ग्रंथ पढ़कर अपनी राय बना रहे हैं। उमंग सिंघार का दावा है कि इतिहास और ग्रंथ आदिवासियों की ताकत दिखाते हैं।