Drug Samples Failed : भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साल 2025 में सिर्फ चर्चित मामलों में कफ सिरप कांड और भोपाल जिला अस्पताल में माउथ वॉश में कीड़े निकलने जैसे 4-5 केस ही सुर्खियों में आए, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा चिंताजनक है।
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25 अमानक दवाओं के मामले दर्ज
मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHSCL) में पूरे साल 25 अमानक (Substandard) दवाओं के मामले दर्ज हुए। इनमें मल्टीविटामिन, ओआरएस, दर्द निवारक दवाओं से लेकर हृदय, किडनी और एचआईवी जैसी लाइफ-सेविंग दवाएं तक शामिल हैं।
सबसे ज्यादा मई 2025 में दर्ज हुए मामले
प्रदेश में सरकारी और निजी अस्पतालों-फार्मेसियों का कुल दवा कारोबार 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का है। ऐसे में अमानक दवाओं के 25 केस बेहद गंभीर हैं। ये मामले सतना, कटनी, जबलपुर, शाजापुर, भोपाल समेत कई जिलों से सामने आए।
सबसे ज्यादा मामले मई 2025 में दर्ज हुए, जब 7 दवाएं अमानक पाई गईं। इनमें मल्टीविटामिन, विटामिन सी, क्लोपीडॉग्रेल (रक्त थक्का रोकने वाली), लेवेटी रेक्टम (मिर्गी की दवा), डोबुटामाइन (हृदय की दवा) जैसी महत्वपूर्ण दवाएं शामिल थीं। इन पर तुरंत रोक लगाई गई और सप्लायर कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई हुई।
अन्य महीनों में भी मामले लगातार आए:
- अगस्त और अक्टूबर में 3-3 अमानक दवाएं
- दिसंबर में 4 अमानक दवाएं
ये दवाएं टाइफाइड, फेफड़ों-मूत्र संक्रमण, खांसी, अस्थमा, एलर्जी, पाचन तंत्र, टीबी, एचआईवी जांच और कब्ज जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।
फफूंद लगी दवा और माउथ वॉश में कीड़े
हाल ही में भोपाल जिला अस्पताल में दो शिकायतें आईं। एक में फफूंद लगी दवा और दूसरे में माउथ वॉश में कीड़े होने का मामला सामने आया। दोनों में सैंपल जब्त कर जांच के लिए भेजे गए, लेकिन एक सप्ताह बाद भी रिपोर्ट नहीं आई।
भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि जांच चल रही है और जल्द रिपोर्ट आएगी। उन्होंने बताया कि जेपी अस्पताल में भी हाल ही में क्वालिटी इंस्पेक्शन कराया गया।