हाइलाइट्स
- 2 मृतकों की गारंटी पर ईरानी डेरे के 14 बदमाशों को मिली थी जमानत।
- महीनों की प्लानिंग कर 400 पुलिस कर्मियों ने की थी धरपकड़।
- अलग अलग आपराधिक माम`लों में इन सभी के खिलाफ मुकदमे हुए थे दर्ज।
Bhopal Irani Gang Fake Bail : मध्य प्रदेश। भोपाल ईरानी डेरे के आरोपियों की फर्जी जमानत का मामला गरमा गया है। पुलिस ने महीनों की प्लानिंग से 400 से ज्यादा कर्मियों की टीम के साथ दबिश दी थी और 32 लोगों को गिरफ्तार किया था। सभी पर अलग-अलग राज्यों में चोरी, लूट और अन्य अपराधों के मुकदमे दर्ज थे। इनमें से 14 आरोपियों को फर्जी जमानतदारों के जरिए जमानत मिल गई। अब यह जमानत खारिज हो सकती है।
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जमानतदारों पहले भी हो चुकी मौत
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जमानत के लिए कोर्ट में जिन लोगों को गारंटर बनाया गया, उनमें से कम से कम दो की मौत दो साल पहले हो चुकी थी। फर्जी दस्तावेज और नाम का इस्तेमाल कर आरोपियों को राहत दिलाई गई। यह खुलासा होने के बाद पुलिस हरकत में आ गई है।
क्या बोले पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी
भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने इस मामले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी और अधिकांश आरोपी अभी जेल में हैं। लेकिन कुछ की जमानत हुई है।
प्रथम दृष्टया मिली जानकारी के अनुसार जमानत के दस्तावेज प्रामाणिक नहीं हैं और जमानतदारों की जानकारी गलत है। पुलिस अपनी वैधानिक प्रति निकालकर अपील दायर करेगी। जो भी वैधानिक कार्रवाई संभव होगी, वह की जाएगी। कमिश्नर का कहना है कि फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दिसंबर 2025 को पुलिस की दबिश
बता दें कि, यह कार्रवाई दिसंबर 2025 के अंत में हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि ईरानी डेरे में अंतरराज्यीय बदमाश छिपे हैं। रात में दबिश के दौरान विरोध और हंगामा हुआ, लेकिन पुलिस ने सभी को पकड़ लिया।
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गंभीर धाराओं में केस दर्ज किए गए लेकिन कोर्ट से जल्द जमानत मिलने से पुलिस की मेहनत पर सवाल उठे थे। अब फर्जी जमानतदारों का मामला सामने आने के बाद पुलिस ऊपरी कोर्ट में अपील कर जमानत रद्द कराने की तैयारी में है।
फिर मशक्कत करेगी पुलिस
अब जमानत खारिज होने पर आरोपी फिर जेल जाएंगे और जांच आगे बढ़ेगी। लेकिन सवाल यह है कि, अब सभी आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस को फिर कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
यह घटना न्याय व्यवस्था और पुलिस की समन्वय पर भी सवाल खड़े कर रही है। कैसे मृत व्यक्ति के नाम पर दस्तावेज पेश हो गए? कोर्ट में वेरिफिकेशन क्यों नहीं हुई?