MP Handpump Inspection : भोपाल। मध्य प्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई 15 से 18 मौतों की त्रासदी के बाद आखिरकार सरकार हरकत में आई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग ने प्रदेश भर में करीब 6 लाख 50 हजार हैंडपंपों की गुणवत्ता और सुरक्षा की व्यापक जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग ने इस के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार की है और इसे तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।
20 जनवरी तक एक विशेष अभियान
इसके साथ ही जल स्रोतों की हर महीने नियमित सफाई और रखरखाव के सख्त आदेश दिए गए हैं। दूषित पेयजल या पाइपलाइन लीकेज से जुड़ी किसी भी शिकायत का निराकरण अब 24 घंटे के अंदर करना अनिवार्य कर दिया गया है।
20 जनवरी तक एक विशेष अभियान चलाकर सभी हैंडपंपों और जल स्रोतों की जांच पूरी की जाएगी। इस अभियान में पानी के सैंपल लिए जाएंगे, हैंडपंपों की मरम्मत की जाएगी और दूषित स्रोतों को तुरंत सील करने की कार्रवाई होगी।
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इंदौर की घटना ने पूरे प्रदेश में पेयजल सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वहां सीवेज का पानी नर्मदा पाइपलाइन में मिलने से डायरिया का भयानक प्रकोप फैला।
अब तक आधिकारिक रूप से 6 से 10 मौतें मानी जा रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों और विपक्ष के दावों के मुताबिक मौतों की संख्या 15 से 18 तक पहुंच चुकी है। सैकड़ों लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
इस त्रासदी के बाद सरकार ने न केवल इंदौर में अधिकारियों पर कार्रवाई की, बल्कि पूरे प्रदेश में पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने का बड़ा कदम उठाया है।
हैंडपंपों की नियमित क्लोरीनेशन
पीएचई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई एसओपी में हैंडपंपों की नियमित क्लोरीनेशन, पानी की गुणवत्ता जांच और आसपास के क्षेत्र में सीवेज लीकेज की निगरानी शामिल है।
ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप मुख्य पेयजल स्रोत हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा सबसे जरूरी है। विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान में कोई कोताही नहीं बरती जाए।