Sehore News : सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुदनी विधानसभा क्षेत्र के बोरखेड़ा गांव में नेशनल हाईवे निर्माण को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। बुधवार को ठेकेदार ने प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी मशीन चला दी और किसानों की खड़ी फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इससे भड़के किसानों ने मौके पर ही विरोध शुरू कर दिया।
उनका आरोप है कि बिना किसी मुआवजे के उनकी मेहनत की कमाई उजाड़ दी गई। किसान नेता जतिन अरोरा ने बताया कि उनके एक एकड़ खेत में लगी गेहूं की फसल पर जेसीबी चला दी गई। न तो जमीन का सीमांकन हुआ और न ही चीरे लगाए गए। अब तक मुआवजा राशि भी नहीं मिली है।
गांव के करीब 70 प्रतिशत किसानों को अभी तक जमीन अधिग्रहण का कोई मुआवजा नहीं मिला है। जिन किसानों को पैसा दिया गया है, उन्हें सिर्फ जमीन का मूल्य मिला, फसल का नहीं। किसानों का कहना है कि फसल ही उनका एकमात्र सहारा है। एक किसान ने गुस्से में कहा, “फसल से ही घर चलता है।
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बिना मुआवजे के हम इसे मिटने नहीं देंगे। जब तक बोई गई फसल का पूरा पैसा नहीं मिलेगा, हम हाईवे का निर्माण नहीं चलने देंगे।” विरोध के चलते ठेकेदार का काम ठप हो गया। सैकड़ों किसान सड़क पर उतर आए और जेसीबी मशीनों को आगे बढ़ने नहीं दिया।
यह मामला नेशनल हाईवे 146बी के पहले चरण से जुड़ा है, जो बुधनी से भैरूंदा तक बन रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र में ही ऐसी घटना होने से किसानों में असंतोष बढ़ गया है। उन्होंने प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया।
किसान ने बताया कि अधिग्रहण के नाम पर जबरदस्ती की जा रही है। मुआवजा राशि भी बहुत कम है, जो बाजार मूल्य से मेल नहीं खाती। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा।
मौके पर पहुंचे राजस्व अधिकारी सुधीर कुशवाहा ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि किसानों के बैंक खातों में मुआवजा राशि धीरे-धीरे जमा की जा रही है। जो किसान अभी तक नहीं ले पाए हैं, वे तुरंत कार्यालय में संपर्क करें।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि खड़ी फसल के लिए अलग से मुआवजे का कोई सरकारी प्रावधान नहीं है। सिर्फ जमीन अधिग्रहण का पैसा ही दिया जाता है। लेकिन किसान इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका तर्क है कि फसल नष्ट होने से उनका पूरा साल बर्बाद हो जाता है।