MP Protest against IAS officer Santosh Verma: विदिशा / भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुक्रवार को वल्लभ भवन (मंत्रालय) के सामने ब्राह्मण बेटियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले IAS अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष वर्मा के बयान से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है।
प्रदर्शनकारियों ने “संतोष वर्मा मुर्दाबाद” के नारे लगाए, भगवान परशुराम और जय श्री राम की जयकारे किए। साथ ही, श्री हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया गया। सभी दलों – कांग्रेस, भाजपा और अन्य संगठनों – के लोग एकजुट होकर राज्य सरकार से मांग की कि वर्मा का IAS अवॉर्ड वापस लिया जाए, उनके खिलाफ FIR दर्ज हो और उन्हें जेल भेजा जाए।
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प्रदर्शन में तख्तियां लिए सैकड़ों लोग पहुंचे। मंत्रालय कर्मचारी अधिकारी संघ के सुधीर नायक, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, भाजपा नेता गिरीश शर्मा, पुष्पेंद्र मिश्रा, मयूर उपाध्याय जैसे प्रमुख नाम शामिल रहे। पुलिस की सख्त सुरक्षा में चला यह धरना करीब दो घंटे तक रहा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्मा का 23 नवंबर को अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में दिया गया बयान – “आरक्षण तब तक चलेगा जब तक ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे को दान न कर दे या उसके साथ संबंध न बनाए” – न केवल जातिवादी है, बल्कि महिलाओं की गरिमा पर भी चोट करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से ही हंगामा मचा हुआ है।
यह प्रदर्शन अजाक्स संगठन के आंतरिक विवाद को भी उजागर कर रहा है। वर्मा के अलावा, पूर्व अध्यक्ष और पूर्व अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया पर संगठन के खातों से 65 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का आरोप लग रहा है। मुकेश मौर्य गुट के प्रांतीय महासचिव मुरारी लाल लिथोरिया ने 13 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपा।
इसमें कहा गया कि कंसोटिया और तत्कालीन महासचिव एसएल सूर्यवंशी ने विभागीय पद का दुरुपयोग कर SBI टीटी नगर और BOI अरेरा कॉलोनी के खातों से 65 लाख रुपये निकाले। इसे अमानत में खयानत बताया गया। नई कार्यकारिणी का दावा है कि मौर्य के नेतृत्व में खाते नियंत्रण में आने के बाद भी यह निकासी हुई।
अजाक्स में गुटबाजी पुरानी है। 29 जुलाई 2023 को ग्वालियर आम सभा में मुकेश मौर्य को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया, लेकिन कंसोटिया ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। रजिस्ट्रार ने मौर्य पक्ष को वैध माना, फिर भी विवाद बरकरार है। सेवानिवृत्त अधिकारी गौतम पाटिल ने कंसोटिया को फिर महासचिव बनाया, जो रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ है। अपील विचाराधीन है।
मौर्य गुट ने आरोप लगाया कि कंसोटिया ने संगठन पर कब्जा बनाए रखने के लिए राजवीर अग्निहोत्री जैसे व्यक्ति को महत्व दिया, जिन पर 2018 में रेलवे ट्रैक उखाड़ने का केस है। वे जेल भी काट चुके हैं। ऐसे लोगों को पद देकर सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रहा है।
मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि 65 लाख के आर्थिक घोटाले की उच्चस्तरीय जांच हो, कंसोटिया और अग्निहोत्री पर वैधानिक कार्रवाई हो, मौर्य को संगठन पर पूर्ण नियंत्रण मिले और विभिन्न विभागों को भेजे जा रहे पत्रों पर रोक लगे। वल्लभ भवन प्रशासन सतर्क है, क्योंकि दोनों गुटों के बीच टकराव बढ़ सकता है।
इधर, विदिशा में भी शुक्रवार को युवा ब्राह्मण विकास परिषद के बैनर तले सर्व समाज के लोगों ने IAS वर्मा का पुतला दहन किया। महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और कहा कि यह बयान सभी बेटियों की मर्यादा पर आघात है।
पूर्व विधायक शशांक भार्गव ने इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, “समाज को बांटने वाले को बख्शना नहीं चाहिए। यह संपूर्ण समाज की गरिमा का सवाल है।”
प्रदर्शनकारियों ने CM के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें IAS आचरण नियमों के तहत कार्रवाई और FIR की मांग की। संगठनों ने चेतावनी दी कि कार्रवाई न हुई तो आंदोलन तेज होगा।
सरकार ने पहले ही वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने इसे विकृत मानसिकता बताया। विपक्ष ने भी FIR की मांग की। वर्मा ने सफाई दी कि बयान का संदर्भ गलत लिया गया, लेकिन गुस्सा शांत नहीं हो रहा। यह मामला अब जातिगत तनाव बढ़ाने वाला बन गया है।