Jabalpur Paddy Scam : जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में 43 करोड़ रुपये के धान खरीदी घोटाले में सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 12 अधिकारियों-कर्मचारियों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी हो गए हैं। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने इसकी मंजूरी दी है। इन संपत्तियों को नीलाम कर नुकसान पूरा किया जाएगा। घोटाले में 16 मिल मालिकों और 12 अधिकारियों की मिलीभगत थी। जांच में फर्जी परिवहन, खराब चावल जमा करना और अच्छे धान बेचना सामने आया। कुल 43 करोड़ का नुकसान हुआ, जिसमें से 16 करोड़ की वसूली इन अधिकारियों से होगी।
घोटाला पिछले साल का है। मिल मालिकों ने सरकारी गोदाम से धान मिलिंग के लिए लिया, लेकिन चावल वापस नहीं किया। अच्छा धान बाजार में बेच दिया। बदले में खराब चावल खरीदकर जमा किया। ट्रांसपोर्टेशन का पैसा लिया। गाड़ियों के नंबर स्कूटर-कार के दिखाए गए। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जांच कराई। 16 मिल मालिकों पर FIR दर्ज। 12 अधिकारियों को दोषी पाया। सहकारी समिति के 4 कर्मचारियों पर भी नोटिस।
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कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “पूर्व अनुभव खराब। इस बार खरीदी में स्वयं सहायता समूह को आगे लाया। ट्रेनिंग दी। पूरा काम CCTV निगरानी में। सर्वेयर, नोडल ऑफिसर और अधिकारी ड्यूटी पर। प्रतिदिन रिपोर्ट।” उन्होंने कहा, “घोटाले से किसानों को भुगतान रुका। वसूली से नुकसान पूरा होगा।”
43 करोड़ घोटाले का विस्तृत खुलासा
2024 में जबलपुर जिले में धान खरीदी के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। 43 राइस मिलर्स के खातों में गड़बड़ी पाई गई। कुल 19,910 क्विंटल चावल गायब पाया गया, जिससे करीब 5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़े स्तर पर छापेमारी की। 150 प्रोक्योरमेंट कमिटियां और 140 वेयरहाउस की जांच की गई।
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जांच का दायरा 12 जिलों तक फैला। कलेक्टर ने विशेष समिति गठित की। मिल मालिकों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए। परिवहन बिना हुआ, फिर भी बिल बनाए गए। किसानों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिला, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ।
16 मिल मालिकों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 316(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें 13 कर्मचारी और 44 प्रोक्योरमेंट सेंटर स्टाफ शामिल पाए गए। दोषी मिलर्स को ब्लैकलिस्ट किया गया और उनकी बैंक गारंटी जब्त कर ली गई। 2025 में मामले ने नया मोड़ लिया जब हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच की मांग पर नोटिस जारी किया। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जनहित याचिका (PIL) दाखिल की। चीफ जस्टिस संजीव सच्चदेवा की बेंच ने 12 नवंबर को सुनवाई निर्धारित की है।
12 अधिकारियों की संपत्ति कुर्की का प्रक्रिया
वर्तमान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सभी दोषी अधिकारियों को नोटिस जारी किए। उनकी चल और अचल संपत्ति कुर्क की जा रही है। नीलामी प्रक्रिया से 16 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य है। सहकारी समिति के 4 कर्मचारी मुख्य आरोपी हैं। जांच में उनकी सांठगांठ पूरी तरह साबित हो चुकी है।
जिला आपूर्ति नियंत्रक ने पहले मिलर्स को क्लीन चिट दी थी, लेकिन कलेक्टर ने अलग से जांच का जिम्मा सौंपा तो गड़बड़ी उजागर हुई। कुल 28 लोगों पर FIR दर्ज हुई है और 74 नाम इस घोटाले से जुड़े हैं।
किसानों पर गहरा असर और भविष्य की सतर्कता
घोटाले से हजारों किसानों का भुगतान अटक गया। खरीदी प्रक्रिया में धोखाधड़ी से उन्हें दोहरा नुकसान हुआ। सरकार ने 2025 की धान खरीदी में कड़ी सतर्कता बरतने का फैसला किया है। CCTV कैमरों की निगरानी, नोडल ऑफिसरों की तैनाती और दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है। स्वयं सहायता समूहों को मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है। मिलर्स की पहले से जांच होगी।
यह घोटाला मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा धान घोटाला माना जा रहा है। 2024 में 30 करोड़ का एक घोटाला सामने आया था, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 46 करोड़ तक पहुंच गया। EOW ने 150 कमिटियों की जांच की और 19,910 क्विंटल चावल गायब पाया। 12 जिलों में छापेमारी हुई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा, “नुकसान पूरा किया जाएगा और किसानों को उनका पैसा मिलेगा।” पुलिस ने जांच जारी रखी है। संपत्ति नीलामी से वसूली होगी। मध्य प्रदेश में 2025 धान खरीदी का लक्ष्य 1,500 करोड़ रुपये है और सतर्कता पर जोर दिया जा रहा है।