Bhopal News : भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं का स्मार्ट मीटर के खिलाफ गुस्सा अब चरम पर पहुँच गया है। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (एमपीसीए) के बैनर तले सोमवार (6 अक्टूबर 2025) को दोपहर साढ़े 12 बजे भोपाल के शाहजहानी पार्क में प्रदेशभर से हजारों उपभोक्ता इकट्ठा होंगे।
पूर्व, मध्य और पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की याचिका पर लिया गया यह फैसला उपभोक्ताओं को अस्थायी राहत देगा, लेकिन एमपीसीए का कहना है कि स्मार्ट मीटर ‘लूट का मीटर’ है और विरोध जारी रहेगा।
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बिल 10 गुना बढ़े, उपभोक्ता त्रस्त
एमपीसीए की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह विरोध राजनीतिक नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल है। स्मार्ट मीटर से बिलों में 10 गुना वृद्धि हुई है। भोपाल में 700-800 रुपये के बिल 10-29 हजार हो गए।
ग्वालियर में एक कमरे के घर का बिल 5 हजार और महीने में दो बिल (6-6 हजार) आने की शिकायतें हैं। गुना, सीहोर, विदिशा, सतना, इंदौर, देवास, दमोह, जबलपुर में भी यही हाल। गुना के एक किसान को 2 लाख का बिल मिला। संगठन के मुदित भटनागर ने कहा, “गरीब गहने-बर्तन बेच बिल भर रहे हैं।”
प्रदर्शन के पदाधिकारी सतीश ओझा, आरती शर्मा ने बताया कि मीटर प्री-पेड मोबाइल रीचार्ज जैसा है, कंपनी जब चाहे काट सकती है। TOD (टाइम ऑफ डे) रेटिंग से दिन-रात अलग बिल। खराबी पर बदलने का खर्च। बिल न भरने पर तुरंत कटौती, जुड़वाने पर 350 रुपये। हार्ड कॉपी न मिलना, स्मार्टफोन न होने पर समस्या। अनुबंध पोस्ट-पेड था, प्री-पेड क्यों?
अनिवार्यता 2028 तक बढ़ी
डिस्कॉम ने एमपीईआरसी से अनिवार्यता बढ़ाने की मांग की। तर्क: स्मार्ट मीटर वृहद प्रणाली (मीटर, नेटवर्किंग, डेटा, बिलिंग, सर्वर) है। कर्मी कमी। आयोग ने स्वीकार किया। राहत: शहरी नए कनेक्शन पर सामान्य मीटर, ग्रामीण में नॉन-स्मार्ट। पुराने खराब मीटर 2028 तक बदलने का विकल्प।
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लक्ष्य 1.37 करोड़ स्मार्ट मीटर। पहले चरण 38.47 लाख स्वीकृत, 99.22 लाख दूसरे। 12.56 लाख लगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने कहा, “51 हजार कर्मी भर्ती, एक साल लगेगा।” लेकिन एमपीसीए का विरोध जारी।
एमपीसीए की मांगें
- बिजली जैसे आवश्यक सेवा क्षेत्र के निजीकरण की नीति रद्द की जाए।
- बिजली संशोधन विधेयक 2022 को पूरी तरह रद्द किया जाए, किसी भी नाम पर लागू न किया जाए।
- स्मार्ट मीटर लगाने की नीति को रद्द किया जाए।
- बिजली के बिल हार्ड कॉपी के रूप में और पोस्टपेड ही दिया जाए।
- स्मार्ट मीटर जो लगाए गए हैं, उन्हें हटाकर पुराना डिजिटल मीटर ही लगाया जाए।
- स्मार्ट मीटर के विरोध की प्रक्रिया में विभिन्न बिजली उपभोक्ताओं पर जो एफआईआर दर्ज की गई है, केस बनाए गए हैं, उन्हें निरस्त किया जाए।
- आम उपभोक्ताओं के अनुचित रूप से बढ़े हुए बिलों को (स्मार्ट मीटर और डिजिटल दोनों ही मीटरों द्वारा दिए बिलों को) रद्द किए जाए।
- भविष्य में भी उपभोक्ताओं को उचित व तार्किक बिल ही दिए जाए।
- बिजली के रेट कम से कम होने चाहिए, जिससे गरीब उपभोक्ता भी बिल भर सके।
- अगर कोई बिजली का बिल नहीं भर सका है, उसे तीन माह का समय दिया जाए। उनका बिजली कनेक्शन ना काटा जाए।
- 200 यूनिट बिजली सभी उपभोक्ताओं को निशुल्क दी जाए। बिजली क्षेत्र का पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर आम उपभोक्ता के टैक्स के पैसे से खड़ा है। उपभोक्ता का यह अधिकार है।