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MP News : 40 लाख का सोलर प्लांट 6 साल से ठप, कलेक्ट्रेट का बिजली बिल 22 हजार से 65 हजार, सरकार का प्रोत्साहन फेल

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MP News : हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में सरकार की सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की पोल उस समय खुल गई, जब यह पता चला कि हरदा कलेक्ट्रेट की छत पर लगा 40 लाख रुपये का 50 किलोवॉट का सौर ऊर्जा प्लांट पिछले छह साल से धूल फांक रहा है। यह प्लांट वर्ष 2018 में हाइब्रिड तकनीक के साथ स्थापित किया गया था, जो न केवल बिजली बिल कम करता था, बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन से आय भी अर्जित करता था। लेकिन अब इसकी अनदेखी के कारण कलेक्ट्रेट का मासिक बिजली बिल 22 हजार रुपये से बढ़कर 65 हजार रुपये तक पहुंच गया है। बता दें कि, यह स्थिति तब है, जब केंद्र और राज्य सरकार ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ और ‘पीएम-कुसुम योजना’ के तहत लोगों से सौर ऊर्जा अपनाने की अपील कर रही हैं।

सौर प्लांट की अनदेखी

हरदा कलेक्ट्रेट में स्थापित यह सौर ऊर्जा प्लांट अपनी शुरुआत में एक मिसाल था। 50 किलोवॉट की क्षमता वाला यह प्लांट कार्यालय की बिजली जरूरतों को पूरा करता था और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर आय का स्रोत भी बनता था। लेकिन 2018 के बाद से इसकी देखरेख और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते यह पूरी तरह बंद हो गया।

नतीजा यह हुआ कि कलेक्ट्रेट का बिजली बिल, जो पहले 22 हजार रुपये मासिक था, अब 65 हजार रुपये तक पहुंच गया है। यह राशि सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि सौर प्लांट के बंद होने के बाद बिजली की बर्बादी भी बढ़ी है। कई बार कार्यालय खाली होने के बावजूद लाइट्स, पंखे और एसी चलते रहते हैं।

कलेक्टर का वादा

हरदा के कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया कि सौर ऊर्जा प्लांट की अनदेखी हुई है। उन्होंने कहा, “हमें इसकी जानकारी मिली है। बंद पड़े सौर प्लांट को जल्द से जल्द शुरू कराया जाएगा।” साथ ही, उन्होंने कार्यालयों में बिजली की बर्बादी पर चिंता जताई।

कलेक्टर ने बताया कि कई बार कर्मचारी कार्यालय छोड़ने के बाद भी बिजली के उपकरण चालू छोड़ देते हैं, जिससे बिल बढ़ता है। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि बिजली का उपयोग जिम्मेदारी से करें।

जैन ने यह भी आश्वासन दिया कि तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम जल्द ही प्लांट की जांच करेगी। “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि प्लांट फिर से चालू हो और बिजली बिल में कमी आए। साथ ही, भविष्य में इसकी नियमित देखभाल की जाएगी,” उन्होंने कहा। यह कदम न केवल सरकारी खर्च को कम करेगा, बल्कि सौर ऊर्जा के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ाएगा।

सरकार की सौर ऊर्जा योजनाएं

केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही हैं। इनमें शामिल हैं:

– पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: इस योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए 1 से 3 किलोवॉट के सिस्टम पर 30 हजार से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही, कम ब्याज दर पर ऋण और आसान किस्तों की सुविधा भी उपलब्ध है। यह योजना घरेलू बिजली खर्च को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।

– पीएम-कुसुम योजना: यह योजना किसानों को लक्षित करती है, जिसमें वे अपनी कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन कर सकते हैं। इससे न केवल उनकी बिजली जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित की जा सकती है।

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