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MP News : CM हेल्पलाइन पर झूठी शिकायत करने वालों की अब खैर नहीं, कलेक्टर्स से मांगी रिपोर्ट

cm mohan yadav

MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने उन लोगों पर सख्ती शुरू कर दी है, जो सीएम हेल्पलाइन और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर झूठी शिकायतें दर्ज कर अधिकारियों और कर्मचारियों को ब्लैकमेल करते हैं। लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि ऐसे आदतन शिकायतकर्ताओं की जानकारी एक तय फॉर्मेट में पेश करें।

यह कदम फर्जी शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए 26 सितंबर 2025 को लिया गया है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव पहले ही ऐसे मामलों में FIR दर्ज करने के निर्देश दे चुके हैं। अब सरकार ने पहली बार औपचारिक आदेश जारी कर कलेक्टरों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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फॉर्मेट में मांगी जानकारी

लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने कलेक्टरों को एक विशेष फॉर्मेट भेजा है, जिसमें निम्नलिखित जानकारी शामिल होगी:
– पहचान के लिए शिकायतकर्ता का नाम और मोबाइल नंबर।
– अब तक दर्ज की गई शिकायतें।
– शिकायत की प्रामाणिकता और ब्लैकमेलिंग का संदेह।

यह डेटा कलेक्टरों द्वारा लेवल-1 और लेवल-2 अधिकारियों की लॉगिन आईडी के जरिए सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। हर जिले की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर कार्रवाई होगी।

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सीएम हेल्पलाइन पर बार-बार उभरा मुद्दा

सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठकों में बार-बार सामने आया कि कुछ लोग जानबूझकर फर्जी और बार-बार शिकायतें दर्ज कराते हैं। इनका मकसद अधिकारियों पर दबाव बनाना, ब्लैकमेल करना या निजी हित साधना होता है।

कई बार शिकायतें बेबुनियाद होती हैं, जिनसे प्रशासन का समय और संसाधन बर्बाद होते हैं। उदाहरण के लिए, भोपाल और इंदौर में कुछ शिकायतकर्ताओं ने एक ही मुद्दे पर 50+ शिकायतें दर्ज कीं, जो जांच में झूठी पाई गईं।

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मुख्यमंत्री का सख्त रुख

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जून 2025 की समीक्षा बैठक में कहा था, “ऐसे लोग जो ब्लैकमेलिंग के लिए सिस्टम का दुरुपयोग करते हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज हो।” मुख्य सचिव ने भी कलेक्टरों को चेतावनी दी थी कि फर्जी शिकायतों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई करें। अब औपचारिक आदेश से यह प्रक्रिया व्यवस्थित हो रही है।

क्या होगा असर?
सीएम हेल्पलाइन पर वास्तविक शिकायतों को प्राथमिकता मिलेगी।
आदतन शिकायतकर्ताओं पर FIR का डर।
समय और संसाधनों की बचत।

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वास्तविक शिकायतों की अनदेखी का डर
कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई कि सख्ती के चक्कर में वास्तविक शिकायतकर्ताओं को निशाना बनाया जा सकता है। भोपाल के एक RTI एक्टिविस्ट ने कहा, “सही शिकायतों को झूठा बताकर दबाने का खतरा है।”

सरकार ने स्पष्ट किया कि जांच में पारदर्शिता बरती जाएगी। 2024 में भोपाल में एक शख्स पर 20 फर्जी शिकायतों के लिए FIR हुई थी। जबलपुर में भी एक समूह पर ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज हुआ।

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