Narmadapuram News : मध्य प्रदेश। नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में किसानों की मेहनत पर पानी फेरने वाला नकली उर्वरक बेचा जा रहा था। राजपूत कृषि सेवा केंद्र के संचालक हुकुम सिंह राजपूत पर खराब गुणवत्ता वाले जिंक सल्फेट बेचने और गलत भंडारण का आरोप लगा है। गुरुवार को सिवनी मालवा थाना पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर ली।
उर्वरक निरीक्षक डॉ. राजीव यादव ने बताया कि राजपूत कृषि सेवा केंद्र से जिंक सल्फेट 33% का एक नमूना लिया गया था। इसे उज्जैन स्थित उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला भेजा गया। केंद्र की ओर से दावा किया गया था कि इस उर्वरक में 33% जिंक और 15% सल्फर मौजूद है – जो फसलों के लिए अमृत समान होता है लेकिन रिपोर्ट ने सबको स्तब्ध कर दिया।
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प्रयोगशाला की जांच में पाया गया कि उर्वरक में न जिंक था, न सल्फर – दोनों पोषक तत्व शून्य प्रतिशत! यानी किसान जो पैसा लगा रहे थे, वो सिर्फ रेत या बेकार पदार्थ पर उड़ रहा था।
उर्वरक निरीक्षक डॉ. यादव ने आगे कहा, “यह नकली उत्पाद किसानों की फसल को बर्बाद करने वाला जहर साबित हो सकता था।” जिले के किसान, जो पहले से ही मौसम और बाजार की मार झेल रहे हैं, अब ऐसे धोखे से कैसे निपटें? यह सवाल हर खेत मजदूर के मन में कौंध रहा है।
यह जिंक सल्फेट एमरॉन एग्रो केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित बताया गया था। लेकिन जब कृषि विभाग ने कंपनी से संपर्क किया, तो उन्होंने साफ-साफ कह दिया: “हमने पिछले 2-3 सालों से इस उत्पाद का न तो उत्पादन किया है और न ही मध्यप्रदेश में कहीं बेचा है।” यह बयान सुनते ही साफ हो गया कि बाजार में घूम रहा यह सामान पूरी तरह नकली या अमानक था। संभवतः कोई फर्जी लेबल चिपकाकर किसानों को ठगा जा रहा था।
उपसंचालक कृषि ने तुरंत कार्रवाई की और केंद्र में बचे हुए पूरे स्टॉक पर प्रतिबंध लगा दिया। न बिक्री, न भंडारण, न परिवहन – सब कुछ फ्रीज! इसके बाद थाने में शिकायत दर्ज करवाई, और FIR हो गई। हुकुम सिंह राजपूत अब जांच के घेरे में हैं और पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
इस कार्रवाई के पीछे कलेक्टर की बड़ी भूमिका रही। जिले में अमानक खाद और उर्वरकों की बिक्री पर सख्ती के उनके निर्देशों का ही नतीजा है कि समय रहते यह मामला पकड़ा गया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि किसानों को नकली उत्पादों से बचाना पहली प्राथमिकता है। इसके तहत जिले भर में लगातार जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। हर कृषि केंद्र पर नजर, हर विक्रेता पर पैनी निगाह।
प्रशासन ने सभी दुकानदारों को सख्त चेतावनी जारी की है: “गड़बड़ी पाई गई तो FIR से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई होगी।” यह अभियान नर्मदापुरम के किसानों के लिए राहत की सांस है, क्योंकि नकली उर्वरक न सिर्फ फसल बर्बाद करते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक नुकसान पहुंचाते हैं। एक किसान ने बताया, “अगर हमारी फसल खराब हो जाती, तो पूरा साल बर्बाद। अच्छा हुआ, विभाग जाग गया।”