Betul Students Marched : बैतूल,मध्य प्रदेश। बैतूल जिले के शाहपुर स्थित एकलव्य छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने बुधवार को छात्रावास की खराब व्यवस्थाओं से तंग आकर बैतूल कलेक्टर से शिकायत करने के लिए 36 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा शुरू कर दी। बरेठा घाट तक पहुंचते ही प्रशासन की नींद टूट गई और कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूरवंशी खुद शाहपुर पहुंचे। छात्रों की फरियाद सुनने के बाद उन्होंने वाहनों की व्यवस्था कर बच्चों को वापस लौटाया।
छात्रों का 36 किमी लंबा पैदल मार्च
शाहपुर एकलव्य छात्रावास के छात्र लंबे समय से खराब खाने, मेडिकल सुविधाओं की कमी और भवन की जर्जर हालत से जूझ रहे थे। बुधवार सुबह उन्होंने फैसला किया कि वे पैदल ही बैतूल कलेक्टर के पास अपनी बात रखेंगे। लगभग 36 किलोमीटर की दूरी तय करने निकले इन मासूमों की खबर बरेठा घाट तक पहुंचते ही प्रशासन हरकदम पर सक्रिय हो गया।
पुलिस और स्थानीय अधिकारी रास्ते में उन्हें रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन छात्र नहीं माने। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर सूरवंशी ने तुरंत शाहपुर का रुख किया और छात्रों से आमने-सामने बात की। उनकी यह पहल छात्रों के बीच भरोसा जगाने वाली साबित हुई।
बंद कमरे में डेढ़ घंटे की चर्चा
कलेक्टर के पहुंचने पर शाहपुर एसडीएम, तहसीलदार और एसडीओपी भी मौके पर हाजिर हो गए। सूरवंशी ने छात्रों को इकट्ठा कर लगभग डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में उनकी बातें सुनीं। छात्रों ने खुलकर अपनी परेशानियां बताईं – अच्छा खाना न मिलना, मेडिकल सुविधाओं का अभाव, अधूरे निर्माण कार्य और स्कूल प्रिंसिपल, नर्स तथा काउंसलर के रवैये पर शिकायतें।
एक छात्र ने भावुक होकर कहा, “हम यहां पढ़ने आए हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के बिना कैसे पढ़ाई करें?” कलेक्टर ने सभी बातों को गंभीरता से नोट किया और आश्वासन दिया कि समस्याओं का तत्काल समाधान होगा।
उन्होंने छात्रावास का निरीक्षण भी किया, जहां अव्यवस्थाओं को देखकर नाराजगी जाहिर की। अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं पर तुरंत काम शुरू हो, और जिम्मेदारों से जवाब तलब किया जाएगा।
एकलव्य योजना पर सवाल
बता दें कि, शाहपुर का एकलव्य छात्रावास केंद्र सरकार की एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रहने-सहने की बेहतर सुविधाएं देना है। लेकिन यहां खराब खान-पान, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर से छात्रों का मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है।