Uproar in Electricity Office in Sehore : मध्य प्रदेश। सीहोर जिले के इछावर में एक ऐसी घटना ने सबको हिलाकर रख दिया, जो बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सामाजिक तनाव को उजागर करती है। एक युवक जिसने मदद के इरादे से कुछ किसानों के नाम बिजली विभाग को बताए, उसी मदद ने उसे मौत के कगार पर पहुंचा दिया। मारपीट, अपमान और मानसिक दबाव ने उसे ऐसा खौफनाक कदम उठाने को मजबूर किया कि वह बिजली कार्यालय में आत्महत्या की कोशिश करने पहुंच गया।
ये है पूरा मामला
यह वाकया बुधवार का है, जब नरसिंहखेड़ा गांव के जगदीश कुमार भाऊखेड़ी विद्युत वितरण केंद्र पहुंचे। जगदीश ने बताया कि उन्होंने बिजली विभाग के जेई हीरालाल को बिजली चोरी और बिल से जुड़ी कार्रवाई के लिए 30-35 किसानों के नाम और पते दिए थे। उनका मकसद सिर्फ सहयोग करना था, लेकिन यह मदद उनके लिए मुसीबत बन गई।
जब विभाग ने इन किसानों को नोटिस भेजे, तो ग्रामीणों ने जगदीश को मुखबिर समझकर उसकी पिटाई कर दी। इस मारपीट से वह पहले ही टूट चुका था, लेकिन असल सदमा तब लगा जब वह अपनी शिकायत लेकर जेई हीरालाल के पास पहुंचा।
जेई पर अपमान का आरोप
जगदीश का आरोप है कि जेई ने न सिर्फ उसकी बात को अनसुना किया, बल्कि उसे अपमानित भी किया। इस व्यवहार से आहत होकर जगदीश ने पहले ट्रांसफॉर्मर पर चढ़कर आत्महत्या की कोशिश की। ग्रामीणों और परिजनों ने किसी तरह उसे नीचे उतारा और समझाया लेकिन दुख और गुस्से में डूबा जगदीश रुका नहीं।
उसने बिजली कार्यालय का गेट अंदर से बंद किया। खुद को जंजीरों से बांध लिया। इसके बाद फांसी लगाने की कोशिश की। इस बार भी स्थानीय लोगों ने गेट तोड़कर उसकी जान बचाई। परिजनों ने उसे शांत किया, तब जाकर मामला थमा।
जांच की मांग
इस घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जेई हीरालाल का रवैया गलत था और उनकी मांग है कि इस मामले की गहन जांच हो। लोग चाहते हैं कि बिजली चोरी के नाम पर हो रही कार्रवाइयों में पारदर्शिता बरती जाए, ताकि कोई और जगदीश ऐसी स्थिति का शिकार न बने। घटना के बाद जेई और अन्य अधिकारियों के फोन बंद होने से मामला और संदिग्ध हो गया है।