ट्विशा शर्मा केस: निष्पक्ष ट्रायल को लेकर पिता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, दूसरे राज्य में केस ट्रांसफर की मांग
ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े कथित दहेज प्रताड़ना मामले में उनके पिता नवनिधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई की आशंका जताते हुए केस को मध्य प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की है। वहीं आरोपी पति की डिफॉल्ट बेल पर 5 अक्टूबर को फैसला आएगा।

Twisha Sharma Case: मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े कथित दहेज प्रताड़ना मामले में कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने ट्रांसफर पिटीशन दाखिल कर केस की सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर किसी दूसरे राज्य में कराने की मांग की है। याचिका में आरोपी पक्ष से जुड़े एक पूर्व जिला जज के प्रभाव का हवाला देते हुए निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताई गई है। वहीं, भोपाल की अदालत में आरोपी पति समर्थ सिंह की डिफॉल्ट बेल अर्जी पर भी सुनवाई पूरी हो चुकी है।
पिता ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों दाखिल की याचिका?
सूत्रों के मुताबिक, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मामले के ट्रायल को मध्य प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की गई है। याचिका में निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चिंता जाहिर की गई है। परिवार का तर्क है कि आरोपी पक्ष से जुड़े पूर्व जिला जज के प्रभाव के कारण उन्हें स्थानीय स्तर पर ट्रायल की निष्पक्षता को लेकर आशंका है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से किसी अन्य राज्य की अदालत में मामले की सुनवाई कराने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, ट्रांसफर पिटीशन पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। फिलहाल यह मामला अदालत के विचाराधीन है।
मामले में सीबीआई कर रही जांच
बता दें, ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई कर रही है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसी बीच आरोपी पति समर्थ सिंह की ओर से भोपाल की अदालत में डिफॉल्ट बेल के लिए आवेदन दिया गया है। बचाव पक्ष ने जांच और चार्जशीट दाखिल करने की समय-सीमा को आधार बनाते हुए वैधानिक जमानत की मांग की है।
90 दिन की समय-सीमा को लेकर बचाव पक्ष की दलील
डिफॉल्ट बेल पर सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह के वकीलों ने दलील देते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने कानून में निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर जांच पूरी नहीं की। बचाव पक्ष का दावा है कि तय अवधि के भीतर दाखिल की गई चार्जशीट अधूरी थी। इसी आधार पर आरोपी पक्ष ने कहा कि उसे वैधानिक रूप से डिफॉल्ट बेल का अधिकार बनता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद भोपाल की अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
5 अक्टूबर को आ सकता है बेल पर फैसला
जानकारी के अनुसार, आरोपी पति समर्थ सिंह की डिफॉल्ट बेल अर्जी पर भोपाल कोर्ट अब 5 अक्टूबर को फैसला सुनाएगी। अदालत के इस आदेश पर मामले से जुड़े पक्षों की नजर बनी हुई है। यदि अदालत डिफॉल्ट बेल की मांग स्वीकार करती है तो आरोपी को वैधानिक आधार पर राहत मिल सकती है। वहीं, आवेदन खारिज होने की स्थिति में उसकी हिरासत जारी रह सकती है। अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।


