खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग योजना को कैबिनेट की हरी झंडी, मिलेंगे ₹1,856 करोड़, CM डॉ. यादव ने की तारीफ
केंद्र ने खेल उपकरण निर्माण के लिए ₹1,856.67 करोड़ की योजना मंजूर की। CM मोहन यादव ने कहा, इससे तकनीक, रोजगार और भारतीय खेल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

भारत में खेल उपकरणों के निर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के लिए वर्ष 2026 से 2033-34 की अवधि में 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना से खेल उपकरण निर्माण, आधुनिक तकनीक और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
खिलाड़ियों को बेहतर खेल सामग्री मिलने की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह योजना खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे देश में खेल सामग्री बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा और खिलाड़ियों के लिए बेहतर उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी। डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय को खेलों के विकास और खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत को खेल उपकरण निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में इसे उपयोगी पहल बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया।
कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का मिलेगा मौका
योजना का मुख्य उद्देश्य देश में खेल उपकरण निर्माण के लिए निवेश आकर्षित करना और घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करना है। इसके तहत भारतीय और वैश्विक निर्माताओं को निर्धारित खेल उपकरण निर्माण क्षेत्रों में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कंपनियों को उत्पादन और कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देने की योजना भी है। इससे विनिर्माण क्षेत्र में नई गतिविधियां शुरू होने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डिजाइन और नई तकनीक पर रहेगा ध्यान
खेल उपकरणों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और बेहतर गुणवत्ता वाला बनाने के लिए अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना में सामग्री विज्ञान, सुरक्षा उपकरणों और उन्नत विनिर्माण तकनीकों से जुड़े शोध को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है। स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों को सहयोग देकर नए उत्पादों और निर्माण प्रक्रियाओं के विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे भारत में खेल उपकरणों के डिजाइन और तकनीकी विकास की क्षमता मजबूत हो सकती है।
छोटे उद्योगों और क्लस्टरों को भी मदद
केंद्र की योजना में MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी महत्व दिया गया है। मौजूदा खेल उपकरण निर्माण क्लस्टरों में साझा सुविधाएं विकसित करने और विनिर्माण इकाइयों को आधुनिक बनाने में सहायता देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से गुणवत्ता प्रमाणन हासिल करने और उसका नवीनीकरण कराने में निर्माताओं को सहयोग दिया जाएगा। इस काम के लिए 105 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
कौशल विकास से रोजगार को मिलेगा सहारा
खेल उपकरण उद्योग में प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और उद्योग से जुड़े पक्षों के साथ मिलकर काम करने की योजना है। योजना में भारतीय खेल उपकरणों की ब्रांडिंग, बाजार विकास और निर्यात को प्रोत्साहित करने पर भी जोर है। इससे घरेलू कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
भारत की वैश्विक पहचान मजबूत करने का लक्ष्य
खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग योजना का उद्देश्य भारत को खेल उपकरणों के निर्माण, डिजाइन और विकास में प्रतिस्पर्धी बनाना है। निवेश, तकनीक, कौशल, गुणवत्ता और निर्यात पर एक साथ काम करके इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और रोजगार के अवसर तैयार होंगे। यह पहल मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत@2047 के उद्देश्यों से भी जुड़ी है।
