Carbide Gun Accident : विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में दीवाली की रौनक एक पल में मातम में बदल गई। सोशल मीडिया पर वायरल रील्स देखकर बच्चे कार्बाइड गन का जुगाड़ कर रहे थे। लेकिन ये ‘खिलौना’ घातक साबित हुआ। कम से कम 22 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें कई की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा चुकी है। जिले के मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया। डॉक्टरों का कहना है कि थर्मो-केमिकल बर्न से स्थायी नुकसान हुआ है।
लश्करपुर की 16 साल की नेहा अहिरवार ने इंस्टाग्राम पर वीडियो देखा। घर पर ही 50 रुपये के कार्बाइड, खाली बोतल और लाइटर से गन बनाई। चार बार ठीक चली। पांचवीं बार झांकते ही फटी। चिंगारी आंख में लगी। नेहा डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। अब मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। डॉक्टर कहते हैं, दृष्टि लौटने की उम्मीद न के बराबर। नेहा की मां रोते हुए बताती हैं कि बेटी अब किताबें तक नहीं देख पाती।
11 साल का आयुष भी इसी तरह शिकार हुआ। बंटी नगर में मजदूर पिता राकेश अहिरवार के बेटे ने गन चलाई। चिंगारी आंख में घुस गई। आयुष को भी डॉक्टर बनना था। लेकिन अब गहरी चोट से जूझ रहा है। 20 साल का एमबीए छात्र राजा विश्वकर्मा गली से 150 रुपये में गन खरीदा। छुट्टियों में घर आया था। गन न चलने पर झांका। धमाका हुआ। अब धुंधला दिखता है। राजा कहता है, एक गलती ने सपने तोड़ दिए।
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मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एस.सी.एल. चंद्रवंशी ने बताया कि 11 बच्चे भर्ती हैं। तीन की हालत नाजुक। रोशनी लौटने की संभावना सिर्फ 10 फीसदी। विशेषज्ञ डॉक्टर इलाज कर रहे हैं। जिले में कुल 50 से ज्यादा मामले हैं। भोपाल, ग्वालियर और इंदौर में भी 200 से अधिक घायल हैं।
14 बच्चों की आंखें पूरी तरह चली गईं। ये गन पीवीसी पाइप, कैल्शियम कार्बाइड और पानी से बनती है। गैस बनकर धमाका करती है। लेकिन फटने पर कण आंखों में चुभ जाते हैं। शुक्रवार को कलेक्टर अंशुल गुप्ता और एसपी रोहित काशवानी ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया।
घायलों और परिवारों से मिले। कलेक्टर ने डीन डॉ. मनीष निगम को इलाज में कोई कमी न रखने को कहा। आंखों के लिए तत्काल विशेष व्यवस्था का आदेश दिया। परिवारों को हर मदद का भरोसा दिलाया। एसपी ने जांच तेज करने का कहा। दोषियों पर सख्ती का वादा किया। पुलिस ने 228 गन और 4 किलो कार्बाइड जब्त किया। 7 विक्रेताओं को गिरफ्तार किया।
कलेक्टर ने अपील की कि जुगाड़ गन न चलाएं। एक पल की मस्ती जीवन भर का अंधेरा ला सकती है। सीएम मोहन यादव ने 18 अक्टूबर को ही बैन का आदेश दिया था। लेकिन बाजारों में खुलेआम बिक्री हुई। अब विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई। माता-पिता सतर्क रहें। सोशल मीडिया पर वायरल ‘ग्रीन पटाखा’ असल में जहर है। ये हादसे बच्चों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। जागरूकता जरूरी है।